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महिलाओं के स्तन से आने वाले दूध के बारे में जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी


चाहे आप अनुभवी माँ है या आप पहली बार शिशु को जन्म दे रही हैं, परन्तु फिर भी उन्हें स्तन में आने वाले दूध(कोलोस्ट्रम) से जुड़ी अधूरी जानकारी होती है। इस पोस्ट में आपको वह कब आता है, किस चीज़ का बना होता है, शिशु उसे कैसे ग्रहण करना शुरु करता है, इन सबके अलावा और भी सवालों के जवाब देंगे।

दूध कबसे आना शुरू हो जाता है?

शिशु के जन्म के कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों के भीतर नारी के स्तन से पौष्टिक दूध का स्त्राव निकलना शुरू हो जाता है। इसको शिशु को दूध से परिचित होने के लिए प्रकृति पैदा करती है।

कोलोस्ट्रम की क्या खासियत होती है?

कोलोस्ट्रम में पौष्टिक तत्वों की भरमार होती है। इसमें एंटीबैक्टेरियल और रोग प्रतिरोधक गुण होते हैं। यह कहना गलत नहीं होगा की ये नवजात शिशु के लिए जीवन अमृत की तरह होता है।

कोलोस्ट्रम का रंग पीला होता है और उसका अवरोध गाढ़ा होता है। कुछ महिलाओं में यह पानी जैसा महीन होता है।

कोलोस्ट्रम किस प्रकार निकलना शुरु होता है?

शुरुवात में कोलोस्ट्रम धीमी गति से निकलना शुरु होता है। यह प्रकृति शिशु को माँ का स्तन चूसने से परिचित कराने के लिए करती है। बच्चा माँ का निप्पल पकड़ना, उसे होठों से दबाना, फिर उससे दूध चूसना साथ ही साथ सांस लेना और दूध निगलना सीख लेता है।

कोलोस्ट्रम निकलना शुरू होने के बाद महिला के स्तन में क्या महसूस होता है?

महिला जब बच्चे को स्तनपान कराती है तो इससे 3 से 4 दिन बाद उनके स्तन सुडौल और हलके महसूस होने लगेंगे।

यह एक महत्वपूर्ण लक्षण है जो दर्शाता है की आपके दूध की मात्रा बदल रही है और कोलोस्ट्रम अब सामान्य दूध की भांति बनने लगेगा। यह गाय के दूध के समान दिखता है। कुछ महिलाओं में दूध का बनना अधिक समय ले सकता है। इसमें घबराएं नहीं क्योंकि यह प्राकृतिक प्रक्रिया है और कुछ दिन इधर उधर हो सकते हैं। अपने आप ठीक हो जायेगा।

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