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क्या आप जानती हैं कि बैक लेबर क्या है और इसे कैसे रोका जा सकता है


एक बच्चे को जन्म देना हर मां के लिए दुनिया का सबसे खुशी का पल होता है। गर्भ धारण करते ही मां अपने बच्चे को लेकर कई सपने संजोती है। अपना मातृव्य महसूस करती है लेकिन गर्भावस्था और प्रसव में महिलाओं को कई कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में कमर दर्द, पैर दर्द, थकान, मांस- पेशियों में खिंचाव, ऐंठन आदि शारीरिक परेशानियों से गुजरना होता है और सबसे पीड़ादायक समय होता है जब महिलाओं को प्रसव पीड़ा होती है।

ज्यादातर महिलाओं को तो प्रसव पीड़ा के दौरान पेट में दर्द होता है लेकिन 25 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं, जिनके कमर में प्रसव पीड़ा होती है यानि कि प्रसव के दौरान महिलाओं को पीठ में दर्द होता है। यूं तो इसमें डरने जैसी कोई बात नहीं है लेकिन पीठ दर्द औरत प्रसव के समय असहज बना देती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं प्रसव पीड़ा में कमर दर्द यानी कि बैक लेबर के कारण और उपाय के बारे में....

 

क्या है बैक लेबर

बैक लेबर यानी प्रसव पीड़ा शुरू होते ही महिलाओं के पेट के निचले भाग में दर्द होता है। कभी – कभी पेट की मांसपेशियां संकुचित होने के कारण या टाइट होने के कारण लेबर पेन पीछे की तरफ यानी कमर की तरफ जाने लगता है। यानी प्रसव पीड़ा पेट से शुरू होकर कमर पर चली जाती है। इस पीड़ा के लिए मां तैयार नहीं होती है। इससे कमर के निचले हिस्सों में ऐंठन, जलन और दर्द होता है।

प्रसव पीड़ा कमर में होने के कारण बच्चे को पुश करने में दिक्कत होती है, साथ ही प्रसव की प्रक्रिया में भी देर लग सकती है।

 आखिर क्यों होता है बैक लेबर

बैक लेबर होने के कई कारण हो सकती हैं जैसे कि…

बच्चे की पोजीशन

बच्चे की पोजीशन बैक लेबर के लिए जिम्मेदार हो सकती है। बच्चा गर्भ में किस पोजीशन में है, बैक लेबर भी इस बात पर निर्भर करता है। अगर बच्चे की पोजिशन पीछे की तरफ को होगी तो प्रसव के दौरान पुश करने पर बच्चा मां की रीढ़ की हड्डी से घर्षण करता है, जिससे बैक लेबर हो सकता है। मां के सेक्रम यानी पीछे की तिकोनी हड्डी पर दवाब पड़ने पर भी प्रसव के दौरान कमर में दर्द होता है। ऐसा नहीं है कि हमेशा बच्चे के पोजीशन के कारण ही बैक लेबर होता है। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं।

 मां की छोटी कमर

जिन महिलाओं की कमर छोटी होती है, उन्हें भी बैक लेबर का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि बच्चा मां की कमर से बड़ा होता है। जब बच्चे को बाहर निकलते समय पूरा स्पेस नहीं मिलता है तो वह पीछे की तरफ दवाब बनाता है, जिससे लेबर बैक होता है।

 टाइट मांसपेशियां और अस्थितंत्र

टाइट मांसपेशियां और अस्थितंत्र बच्चे के बाहर आने में बाधा बन सकते हैं, जिस कारण बच्चा पोजिशन बदलता है और बैक लेबर का कारण बनता है।

 गलत मुद्रा

गर्भवस्था के दौरान कई बार महिलाएं गलत मुद्रा में रहती हैं, जिस कारण प्रसव के दौरान बैक लेबर होता है।

पीठ का दर्द या अस्थितंत्र दर्द

अगर महिला को पहले से ही पीठ दर्द की या अस्थितंत्र दर्द की शिकायत रहती है तो बहुत ज्यादा संभावना है कि प्रसव के दौरान बैक लेबर हो।

पीरियड्स में कमर दर्द होना

एक शोध में पता चला है कि जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान कमर दर्द की शिकायत होती है, उनमें बैक लेबर होने की संभावना बढ़ जाती है।

 बैक लेबर को रोकने की तकनीक

लेबर पैन की शुरूवाती दौर में ही कमर दर्द को होने से रोका जा सकता है। जैसे–जैसे लेबर पेन बढ़ता जाता है, वैसे – वैसे महिलाएं सीखती हैं कि दर्द को कैसे मैनेज किया जा सकता है। कोख (जिसे कि श्रेणि भी कहा जाता है) को खोलना और ढीला छोड़ना बच्चे के लिए बाहर आने का आरामदायक रास्ता बनाता है। इससे कमर दर्द से भी बचा जा सकता है। यहां हम कुछ ऐसी तकनीक बता रहे हैं जो बैक लेबर को कम करने में सहायक होगी।

 1.सही मुद्रा में उठें और बैठें

2. अपने कंधे सीधे कर चलें और श्रेणि पर दवाब बनाएं।

3. जैसे मुर्गा बनते हैं, उसी पोजिशन में बैठे और आगे की और चलें लेकिन ध्यान रहें आपके हिप्स आपके घुटने से ऊपर होने चाहिए।

4. दीवार के सहारे पालती मार कर बैठे।

5. बर्थ बॉल पर बैठें, इससे ऊपर की तरफ या आगे की तरफ करें।

6. hula-hoop डांस यानी पेट पर बड़ा सा रिंग डालकर घुमा सकते हैं।

7. अपने हाथ को घुटने पर लगाएं। इससे कमर में प्रेशर पड़ेगा और बच्चा अपनी पोजिशन बदल देगा।

 बैक लेबर को दूर करने के उपाय

अगर बच्चा सही पोजीशन में है और फिर भी आप बैक लेबर में है तो हम आपको कुछ तकनीक बता रहे हैं तो बैक लेबर को कम करने में सहायक होंगी।

1. डिलीवरी के समय अपने पार्टनर को अपने साथ ही रखें। पार्टनर की मदद से सैक्रम पर मजबूत दवाब बनाने को कहें।

2. हाइपोथेरेपी: बर्थ टब या शॉवर

3. गर्म चावल या अनाज का सेक

4. पीछे से किसी रोल वाली चीज से दवाब बनाएं, जैसे पानी की बोतल, कोल्ड ड्रिंक के कैन, टेनिस बॉल, रोलिंग पिन आदि।

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