Link copied!
Sign in / Sign up
11
Shares

बच्चों के लिए रागी : कब और कैसे खिलाना चाहिए ? (Ragi For Babies: When To Introduce? In Hindi)

 रागी अपने उच्च पौष्टिक गुणों के कारण एक स्वास्थयवर्धक भोजन है। यह मानव शरीर को सभी पौष्टिक तत्व प्रदान करता है लेकिन हर मां अपने बच्चे के खाने को लेकर हमेशा सचेत रहती हैं, खासकर कि तब-जब बच्चा छोटा हो।

क्या बच्चों को रागी खिलाना सुरक्षित है। बच्चों को कब और कैसे रागी खिलाना चाहिए। क्या बच्चे को रागी खिलाने से साइड़ इफैक्ट हो सकते हैं। ये कुछ सामान्य से सवाल है, जो अपने बच्चे को रागी खिलाने से पहले हर मां के दिमाग में आते हैं। यह उन सारे सवालों के जवाब हैं, जो रागी के बारे में आपको जरूर पता होने चाहिए।

लेख की विषय सूची

1. रागी क्या है? (What is Ragi in Hindi?)

2. रागी में मिलने वाले पौष्टिक तत्व? (Nutritional value of Ragi in Hindi)

3. बच्चों को रागी कब और कैसे खिलाना चाहिए? (When and how to introduce Ragi to babies in Hindi)

4. बच्चों के लिए रागी का दालिया बनाने की सरल रेसिपी? (Easy Ragi porridge recipe for babies in Hindi)

5. बच्चे को रागी खिलाने के फायदे? (Ragi health benefits for your baby in Hindi)

6. रागी से होने वाले दुष्प्रभाव (Side-effects of Ragi in Hindi)

7. निष्कर्ष (Conclusion)

रागी क्या है (What is Ragi in Hindi?)

रागी (जिसे बजारा या नचनी भी कहा जाता है) एक स्वास्थयवर्धक अनाज है। जिसमें प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इस अनाज का वैज्ञानिक नाम एलिसाइन कोराकाना है। यह जड़ी –बूटियों के समूह का अनाज है, जो शुष्क या अर्धशुष्क क्षेत्रों में उगता है। इस अनाज की खास बात ये हैं कि यह सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता है।

रागी बहुत ही गुणकारी अनाज है लेकिन ज्यादातर लोगों को नहीं पता होता है कि रागी हमारे शरीर के लिए कितना लाभकारी है और जब बच्चों के लिए रागी के स्वास्थ्य लाभों की बात आती है तो इसके पौष्टिक गुण बच्चे के विकास में मददगार होते हैं। रागी को विभिन्न व्यंजनो के रुप में खाया जाता है, जैसे – रागी का डोसा, रागी की रोटी, रागी की खिचड़ी या दालिया आदि।

रागी में मिलने वाले पोषक तत्व (Nutritional value of Ragi in Hindi)

रागी में मिलने वाले पोषक तत्वों के कारण ही यह बच्चों के लिए सबसे बेहतरीन आहार है। रागी स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है, इसमें प्रोटीन, कॉर्बोहाइड्रेट, फाइबर जैसे सभी आवश्यक तत्व शामिल है। इस पौष्टिक अनाज के पौष्टिक गुण इस प्रकार है।

    पौष्टिक तत्व    -            मात्रा

      कंकॉर्बोहाइड्रेट          -          65- 75 प्रतिशत 

      फाइबर                    -          15 – 20 प्रतिशत 

      प्रोटीन                    -           5 – 8 प्रतिशत 

      मिनरल्स                   -           2.5 – 3.5 प्रतिशत 

     कैल्शियम                   -           344 मिलीग्राम

     पौटेशियम                  -            408 मिलीग्राम

     फैट                         -            1.30 प्रतिशत 

     रागी कैलोरीज             -            336 kCal

बच्चों को कब और कैसे देनी चाहिए रागी (When and how to introduce Ragi to babies in Hindi)

यद्यपि ज्यादातर बच्चों को वजन बढ़ाने, रोग–प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए छह महीने तक मां का ही दूध ही सर्वश्रेष्ठ होता है लेकिन प्रत्येक बच्चे की जरूरत अलग–अलग हो सकती हैं। कुछ बच्चों को तीन महीने में ही बाल रोग विशेषज्ञ रागी खिलाने का सुझाव देते हैं। यहां जानिए बच्चों को कब और कैसे रागी खिलाना शुरू करें।

डॉक्टरों को पता होता है कि आपके बच्चे के लिए सबसे बेहतर क्या है इसलिए रागी खिलाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर परामर्श लें। अधिकांश डॉक्टर रागी को बच्चे के पहले आहार के रुप में स्वीकार करेंगे क्योंकि यह लस–मुक्त है और इसमें कम से कम वसा होती है। लेकिन ध्यान रहें कि रागी का आटा शुद्ध हो, इसमें जौ या गेहूं का आटा ना मिलाया गया हो। मिलावटी आटा होने के कारण बच्चे को दस्त, एलर्जी, चकत्ते जैसी स्वास्थय संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इस तरह की परेशानी से बचने के लिए घर पर ही रागी का आटा तैयार करना चाहिए।

बच्चे को पहली बार रागी खिलाने के बाद तीन दिन का इंतजार करना चाहिए। इसे खिलाने के तीन – चार दिन तक बच्चे को कोई और आहार नहीं खिलाना चाहिए। इससे आप जान पाएंगे कि कहीं बच्चे को रागी से एलर्जी तो नहीं हो रही है या फिर बच्चा रागी को ठीक से पचा पा रहा है या नही। यदि बच्चे को रागी खाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा होगा तो उसके शरीर पर चकत्ते हो सकते हैं, अपच, दस्त, बैचेनी, पेट में दर्द की शिकायत हो सकती है। ऐसे में तुरंत बच्चे को रागी खिलाना बंद कर दें और डॉक्टर से परामर्श करें।

छह महीने के बच्चों के लिए रागी को पकाकर उससे निकाला गया मांड (पानी) या घर में बनाया गया आटा सबसे बेहतर है।

रागी को दूध या दही के साथ मिलाकर नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि दूध या दही रागी से आयरन अवशोषण करने में बाधा डाल सकते हैं। इसकी बजाय सिर्फ रागी खिलाने से शरीर में आयरन की आपूर्ति होती है जोकि विटामिन सी से भरपूर फलों से मिलता है।

बच्चे के लिए रागी का दलिया बनाने की सरल रेसिपी (Easy Ragi porridge recipe for babies in Hindi)

यहां रागी का दालिया बनाने के दो तरीके हैं। 10 महीने तक के बच्चे के लिए आप इस तरीके से दालिया बना सकते हैं।

मिश्रण के साथ

1. रागी को साफ करें और उसे धोने के बाद आठ से दस घंटे के लिए भिगो दें।

2. रागी को थोड़े से पानी के साथ ब्लैडर पर पीस लें।

3. कपड़े और कोलांडरकोलांडर  की मदद से मिश्रित मिश्रण से निकलने वाले दूध को ब्लैडर से निकाल लें।

4. अब मिश्रण को कम आंच पर तब तक पकाएं, जब तक वह गाढ़ा ना हो जाए। इसे हल्का ठंडा होने के बाद बच्चे को खिलाएं। गर्म भोजन हल्का होगा और अच्छे से पच भी जाता है।

रागी के आटे के साथ

1. पांच महीने तक के बच्चों के लिए बेहतर हैं कि आप घर पर ही रागी का आटा तैयार करें और इसे मलमल के कपड़े से छान लें क्योंकि इस उम्र के बच्चे मोटे अनाज को नहीं निगल पाते हैं।

2. रागी के आटे को पानी के साथ मिलाएं।

3. पाउडर के सभी हिस्सों को पानी में ठीक से मिलाएं, अगर आप आटे में गुड़ मिलाते हैं तो गुड़ को पहले कम आंच पर गर्म पानी में पिघलने के लिए रख दीजिए और फिर इस पानी को आटा के साथ मिलाएं।

4. इस मिश्रण को तब तक कम आंच पर पकाते रहें, जब तक मिश्रण गाढ़ा ना हो जाए।

5. जब यह बच्चे को खिलाने लायक ठंडा हो जाए, तब बच्चे को खिला दें।

10 महीने से ऊपर के बच्चे के लिए रागी का दलिया

10 महीने के बच्चे के लिए रागी के दलिए में पौषण बढ़ाने के लिए इसमें दो – तीन बादाम भी डाल सकते हैं।

1. बादाम को दो – तीन घंटे के लिए पानी में भिगो दें।

2. अब बादाम के बाहर के छिलके उतार दें और रागी के साथ ब्लेंडर में पीस लें।

3. आप उपरोक्त दी विधियों में से किसी भी विधि से दलिया तैयार कर सकते हैं।

4. अखरोट और बादाम को भिगोकर उनका पाउडर बनाना सबसे अच्छा रहता है। बच्चों के लिए बादाम और अखरोट के शुष्क पाउड़र को पचाना आसान होता है।

आपके बच्चे के लिए रागी के फायदे (Ragi health benefits for your baby in Hindi)

वयस्कों के लिए रागी के बहुत ही स्वास्थ्यवर्धक है, यही कारण है कि यह बच्चों के लिए भी बहुत लाभकारी है। रागी बच्चों को विभिन्न तरीकों से पोषण प्रदान करता है। जिससे उन्हें वजन बढ़ाने, अच्छी नींद लाने में मदद मिलती है। जानिए, आपके बच्चों को रागी खिलाने के क्या–क्या फायदे हैं।

रागी से मिलने वाले उच्च पौषक तत्व

रागी और रागी का आटा पौष्टिकता से भरा हुआ है। रागी से बच्चों को कुपोषण का शिकार बनने से रोका जा सकता है और उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा भी मिलती है।

लैक्सेटिव

रागी में अम्लीय और ग्लुटिनस नहीं होता है और यह एक प्रसिद्ध लैक्सेटिव है। इसलिए आपके बच्चे को कब्ज या कोई और स्वास्थय संबंधी शिकायत होने की कम संभावना होती है।

भूख को कम करना

बच्चे को बेहतर स्वास्थय देने के साथ–साथ इसमें ट्राइपोफान एमिनो एसिड भी होता है, जो भूख को कम करता है।

बच्चे के टम्मी को फुल रखता है

रागी में मौजूद जटिल कॉर्बोहाइड्रेट रक्त प्रवाह में धीरे-धीरे ग्लूकोज को रिलीज करता है। इसलिए बच्चे को अन्य खाद्य पदार्थ की तुलना में रागी खाने से भूख कम लगती है और वह संतुष्ट महसूस करता है।

अच्छी नींद

रागी आपके बच्चे की टम्मी को लंबे समय तक फुल रखता है, इसलिए बच्चे को संतोषजनक और अच्छी नींद आती है।

आयरन और कैल्शियम की कमी से बचाता है

रागी बच्चे के शरीर में आयरन और कैल्शियम की कमी नहीं होने देता है। इससे शरीर में रक्त उत्पादन में भी काफी सुधार होता है।

रोग – प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

उच्च पोषक तत्व से भरपूर रागी बच्चे की रोग–प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

रागी से होने वाले संभावित साइड़ इफैक्ट (Side-effects of Ragi in Hindi)

यों तो रागी बेहद स्वास्थयवर्धक है, बावजूद इसके कुछ साइड़ इफैक्ट भी हैं लेकिन यह रागी की खपत पर निर्भर करता है। इसके साइड़ इफैक्ट से बचने का एक ही तरीका है, संतुलित मात्रा में इसका सेवन करना।

सर्दियों के समय में रागी खाने से आपके बच्चे को सर्दी हो सकती है तो अगर आपका बच्चा पहले से ही सर्दी से पीडित हो तो उसे रागी बिलकुल ना खिलाएं।

रागी के अधिक सेवन से शरीर में ऑक्सीलिक एसिड का अधिक उत्पादन होता है। जिससे किड़नी में पथरी और यूरीन कैलकुली होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए इसका संतुलित मात्रा में सेवन करना चाहिए।

निष्कर्ष (conclusion)

अंत में हम यही कहेंगे कि यदि आपके मन में अपने बच्चे को रागी का सेवन कराने को लेकर कोई भी संदेह है तो बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें और उनकी द्वारा दी गई सलाह का पालन करें।

Tinystep Baby-Safe Natural Toxin-Free Floor Cleaner

Dear Mommy,

We hope you enjoyed reading our article. Thank you for your continued love, support and trust in Tinystep. If you are new here, welcome to Tinystep!

Recently, we launched a baby-safe, natural and toxin-free floor cleaner. Recommended by moms and doctors all over India, this floor-cleaner liquid gets rid of germs and stains without adding harmful toxins to the floor. Click here to buy it and let us know if you liked it.

Stay tuned for our future product launches - we plan to launch a range of homecare products that will keep your little explorer healthy, safe and happy!

Click here for the best in baby advice
What do you think?
0%
Wow!
0%
Like
0%
Not bad
0%
What?
scroll up icon