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जानिए क्यों आपका बच्चा दिन-ब-दिन हो रहा है मोटा, और अपनाएं ये उपाय

बाल्यावस्था में मोटापे से दो तरह के डायबिटीज़, हृदय रोग, अस्थमा, नींद संबंधी समस्याएं जैसे कि एपनिया और हड्डियों से संबंधी समस्याओं का जोख़िम बढ़ता है। इसके अलावा मोटापे से ग्रस्त बच्चों को ज्यादा चिढ़ाया जाता है, जिससे वह अच्छा महसूस नहीं करते हैं, उनमें कम आत्मविश्वास होता है और वह तनाव से पीड़ित होते हैं। बाल्यावस्था से गुजरने के बाद यह मोटापा उनकी युवावस्था में जाता है और इससे होने वाली समस्या और भी बढ़ जाती है।

सबसे पहला कदम यह है कि आप अपने बच्चे का वज़न जांचें और अगर (बीएमआई) 85 परसेंटाइल से ऊपर या 95 से कम हुआ तो यह अधिक वज़न और मोटापे को दर्शाता है। वज़न क्यों बढ़ रहा है, यह जानने से वज़न कम करने में मदद मिलती है। यह है वज़न बढ़ने के कारण और उसके निवारण के उपाय।

कामकाजी माता-पिता या सिंगल पेरेंट्स - आपके कामकाज का आपके बच्चे के मोटापे से क्या लेना देना है? शायद बहुत कुछ है! कामकाजी माता-पिता और सिंगल पेरेंट् दिन-भर काम पर लगे रहते हैं और ऐसे में उन्हें इस बात पर ध्यान देने का समय नहीं मिलता है कि उनके बच्चे क्या खा रहे हैं। और ऐसे में बच्चे को खुद अपनी पसंद का खाना खाने की छूट मिल जाती है, तो कोई भी बच्चा फ्राइड स्नैक्स के आगे फल या पौष्टिक आहार क्यो चुनेगा! साथ ही कामकाजी और सिंगल पेरेंट् अक्सर बाहर खाना खाते हैं, या पैक्ड फूड और प्रोसेस्ड फूड लेते हैं, इसमें अधिक कैलोरी होती है। और प्रोसेस्ड और फ्रिजिंग की प्रक्रिया के दौरान भोजन से सारे पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

आप क्या कर सकते हैं?

एक कूक या केयरटेकर को नियुक्त करें, जो हमेशा इस बात पर नज़र रखे और ध्यान दे कि आपका बच्चा क्या खा रहा है। इससे बच्चे के अस्वस्थ भोजन खाने की संभावना कम होगी।

खाना बनाने के लिए समय निकालें। सिंगल पेरेंट् अपने व्यस्त जीवन में से एक या दो घंटा खाना बनाने के लिए निकाल सकते हैं। इससे आप अगले दिन के लिए भी खाना तैयार कर सकते हैं और इसके माध्यम से आपको और आपके बच्चे को पर्याप्त पौष्टिक आहार भी मिलेगा।

खाना बनाने की जिम्मेदारी लें और एक दिन पिता या एक दिन मां इस तरह अलग-अलग दिन भोजन बनाएं।

2. घर पर गेम खेलना और टेलीविजन की लत

आपका बचपन आपके बच्चे के बचपन से कहीं बेहतर था! अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो यह बिल्कुल सच है। फोन, टेलीविजन, वीडियो गेम के आने से पहले बच्चे बाहर मैदानों में खेल खेलते थे और शारीरिक गतिविधियाँ करते थे। इससे मोटापा अपने आप ही उनसे दूर रहता था। लेकिन अब बच्चे एक ही जगह बैठे रहते हैं और खेल खेलते हैं, जिससे न तो शारीरिक गतिविधि होती है और न ही कैलोरी बर्न होती है साथ ही आंखें कमजोर होती है। इससे वज़न बढ़ता है।

आप क्या कर सकते हैं?

उनके टेलीविजन देखने और फोन चलाने का समय कम कर दें और उन्हें बाहर खेलने और कुछ अच्छा व जानकारी से भरपूर देखने के लिए प्रेरित करें।

ऐसे खिलौने और टेलीविजन कार्यक्रम उन्हें दिखाएं, जिससे वह शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ आहार लेने के लिए प्रेरित हों।

बच्चे के अच्छे व्यवहार के लिए उन्हें तोहफ़ा भी दें। घर पर अन्य लोग क्या खातें है इसकी जांच करें और बच्चे अपने आप बड़ों को देखकर सीखते हैं। बच्चों को साइकलिंग के लिए प्रेरित करें और इस बात का ध्यान रखें कि वह क्षेत्र उनके लिए सुरक्षित हो।

3. तनाव और डिप्रेशन - बाल्यावस्था तनाव लेने और डिप्रेशन में रहने की उम्र नहीं है। मोटापे के कारण बच्चे इस तनाव का शिकार हो सकते हैं। यह तनाव ठीक से काम न कर पाने की समस्याओं, क्षमता न होने के कारण और अन्य दोस्तों द्वारा चिढ़ाए जाने के कारण हो सकता है‌। आपकी तरह बच्चों को भी लगता है कि खाना खाने से वह बेहतर महसूस करेंगे। इससे मोटापा और बढ़ने लगता है।

आप क्या कर सकते हैं?

अगर आपको लगे कि बच्चा इस समस्या से जूझ रहा है तो जल्द से जल्द समाधान निकालें, उन्हें ज्यादा डांटे ना और उनपर बेहतर करने का दबाव ना बनाएँ।

उनके लिए प्यार और देखरेख का वातावरण बनाए और पारिवारिक प्यार प्रेम से उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।

4. सोने का समय - नींद और डिप्रेशन की समस्या एक दूसरे से जुड़ी है और इसका गहरा संबंध मोटापे के साथ है। डिप्रेशन और अन्य मूड संबंधी विकार के कारण बच्चे देर से सोते हैं और देर रात तक जागते हैं, जिससे इन्सोम्निया की समस्या हो सकती है। कम नींद के कारण भूख ज्यादा लगती है। और इसी कारण मोटापा बढ़ता है।

आप क्या कर सकते हैं?

इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे दिन में ना सोए। उन्हें कुछ दिनों तक इसी में व्यस्त रखे ताकि उन्हें इसकी आदत पड़ जाए। तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्या से जूझने में उनकी मदद करें।

सोने से पहले हल्की फुल्की कसरत से उन्हें अच्छी नींद आ सकती है। बेडरूम में शांत संगीत और आरामदेह वातावरण तैयार करें।

5. बोरडम - बच्चे आसानी से ऊब जाते हैं। जब वह ऊब जाते हैं, तो ज्यादा खाते हैं और बहुत सारे गेम खेलते हैं और इससे वह सबकुछ करते हैं जिससे उनकी ऊब दूर हो जाए और इससे मोटापा बढ़ता है।

आप क्या कर सकते हैं?

उन्हें सक्रिय रखें। अपने बच्चे को किसी भी खेल और गतिविधि में व्यस्त रखें। उन्हें उनका मनपसंद खेल खेलने दें।

6. स्कूल का लंच - स्कूल में खुद लंच खरीदने से बच्चों को बहुत आज़ादी मिल जाती है। जिससे वह फ्राइड, प्रोसेस्ड, अधिक कैलोरी वाला भोजन खाते हैं और वह पौष्टिक भी नहीं होता है। इससे मोटापा और तकलीफ़ बढ़ती है।

आप क्या कर सकते हैं?

इस बात का ध्यान रखें कि आप रोज़ाना उनके लिए लंच तैयार करें। उनका पौकेट मनी कम करने से उन्हें स्नैकस पर खर्चा करने से दूर रखा जा सकता है।

साथ ही बेहतर होगा कि आप उन्हें पौष्टिक आहार के लाभ बताए।

7. आनुवंशिक कारण - बच्चों में मोटापा आनुवंशिक कारण से भी हो सकता है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आता है। अगर आप मोटे हैं, तो आपके बच्चों को भी यह होने की संभावना बढ़ सकती है।

आप क्या कर सकते हैं?

अपने बच्चे को सबसे बेहतर और पौष्टिक भोजन दें।

बच्चे को कोई भी खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करें और उन्हें सक्रिय रहने में मदद करें।

इस बात को सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा कम से कम एक घंटा ज़रुर खेले।

जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। 

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