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बच्चों को इतनी मात्रा में नींद मिलना है ज़रूरी- ना मिली तो बच्चे पर पड़ सकता है इसका गलत प्रभाव

एक स्टडी से पता चलता है की बच्चे जिन्हें पर्याप्त नींद नहीं मिलती अक्सर कई बीमारियों के शिकार रहते हैं| CBS ने हर उम्र के बच्चों के सोने का समय बनाया है- CBS ने बताया की जिन बच्चों को पर्याप्त नींद नहीं मिलती वो शारीरिक और मानसिक बीमारियों से झूंझते हैं और साथ में कई गंभीर बीमारियों से भी पीड़ित होते हैं| आइये हम बताएं की अलग उम्र के बच्चों को कितने घंटे सोना चाहिए:

4-12 महीने के शिशु को 1 दिन में 12-16 घंटे सोना अनिवार्य है

1-2 साल के बच्चों को 11-14 घंटे सोना अनिवार्य है

3-5 साल के बच्चों को 10-13 घंटे सोना अनिवार्य है

6-12 साल के बच्चों को 9-12 घंटे सोना अनिवार्य है

13-18 साल के किशोर बच्चों को 8-10 घंटे सोना अनिवार्य है

4 महीने से छोटे बच्चों को कितनी नींद पर्याप्त करनी चाहिए ये बात हमनें ऊपर नहीं बताई क्योंकि जब बात नवजात शिशुओं की आती है तो उनके सोने का कोई सही समय नहीं होता और उन्हें कितने घंटों की नींद चाहिए ये भी किसी स्टडी से साबित नहीं हुआ है| जब बच्चों की नींद पूरी हो जाती है तो उनके स्वाभाव में आपको खुद बा खुद अंतर दिखेगा, उनकी याद्दाश्त, भावुक होने की क्षमता और उनकी पूरी जीवन शैली| जिन बच्चों की नींद पूरी नहीं हो पाती वो अधिकतर परेशान रहते हैं, तनाव का शिकार बनते हैं और खुदको चोट पहुंचाने की भी क्षमता रखते हैं|

 अधिकतर बच्चों की नींद पूरी नहीं हो पाती और उनके कम सोने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई में ध्यान नहीं लगता, स्कूल में ध्यान नहीं दे पाते, सुस्त महसूस करते हैं, मूड बदलने में वक़्त नहीं लगता, वज़न बढ़ने का डर रहता है और आगे चलकर उनके स्वास्थ पे भी खतरा मंडराता है| कम सोना जितना हानिकारक है उतना अधिक सोना भी हानिकारक हो सकता है| आज कल के बच्चों की कम नींद होने का कारण होता है उनका टीवी देखना, मोबाइल पे लगे रहना या वीडियो गेम खेलना, बच्चों को अच्छा महसूस करवाने के लिए उन्हें घर से बाहर निकलना काफ़ी ज़रूरी होता है| अधिक समय तक लाइट में रहने से बच्चों को नींद आने में दिक्कत आती है, इसलिए ये सलाह दी जाती है की बच्चों को सुलाने से आधे घंटे पहले उनके कमरे की लाइट बंद कर दें और बच्चों के कमरे से कंप्यूटर, टीवी, मोबाइल और अन्य गैजेट को बाहर रखें|

अपने बच्चों के सोने का सही वक़्त सेट करें| बच्चों के सोने का एक समय फिक्स होने से उन्हें उस वक़्त पे सोने की आदत हो जाती है और ये उनके लिए काफ़ी लाभदायक होता है| सोने के वक़्त के साथ, बच्चों के ब्रश करने का वक़्त, किताब पढ़ने का समय सेट करलें| हर परिवार को अपने बच्चे की नींद का ख्याल होना चाहिए, ये ना केवल बच्चे के लिए बल्कि परिवार के सभी सदस्य के लिए भी बेहतर होता है| हर परिवार के सोने का अलग-अलग समय होता है, कोई परिवार देर से सोते हैं और देर से उठते हैं और कई परिवार जल्द सोते हैं और जल्द उठते हैं|

इस ब्लॉग के द्वारा हम आपको ये बताना चाहते हैं की बच्चे को पर्याप्त नींद मिलना बेहद ज़रूरी होता है| जिन बच्चों को सही मात्रा में नींद मिलती है वो मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से स्वस्थ रहते हैं और बीमारियों का शिकार नहीं बनते| नींद एक ऐसी ज़रूरत है जिसके माध्यम पर आपका पूरा दिन चलता है- अगर नींद सही से ना हुई हो तो पुरा दिन आपको थकान महसूस होती रहेगी जिसके सीधा प्रभाव आपके कार्य पर पड़ेगा| 

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