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नींद आने पर शिशु देते हैं कुछ इस तरह के संकेत!

शिशु को पहली बार अपनी बाहों में भरना एक मां के लिए इस एहसास को बयां करना आसान नहीं है। मां बनना एक बहुत ही सुखद एहसास होता है, लेकिन मां बनने के साथ-साथ कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। मां बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है शिशु की नींद। पहली बार मां बनने वाली महिलाओं के लिए यह समझना मुश्किल होता है कि बच्चे को कब किस चीज़ की ज़रूरत है, उन्हें कब दूध पिलाना है और किस समय उन्हें सुलाना है और उससे भी बड़ी समस्या यह होती है कि उन्हें कैसे सुलाना है क्योंकि नवजात शिशु काफ़ी रोते हैं, शिशु का ज्यादा रोना एक तरह का यह संकेत होता है कि या तो बच्चे की नींद नहीं पूरी है या फिर बच्चा भूखा है। पर्याप्त नींद लेना बच्चे और मां दोनों की अच्छी सेहत के लिये काफी आवश्यक है। नवजात शिशु बोल नहीं सकते हैं लेकिन रोकर और अन्य तरीकों से वह यह संकेत देते हैं कि उन्हें नींद आ रही है। आइए जानते हैं किस तरह से बच्चे यह इशारा करते हैं कि वह सोना चाह रहे हैं।

शिशु को नींद आने के संकेत कुछ इस प्रकार होते हैं:–

‣ मुट्ठी बंद करना और आँखें रगड़ना

‣ कानों को खींचना

‣ एक टक देखना

‣ पलकें झपकाना

‣ हाथ-पैरों को झटकना

‣ बार-बार रोना

‣ कुछ अन्य संकेत

‣ मुट्ठी बंद करना और आँखें रगड़ना - 

बच्चा जब भी सोना चाहता है तो वह अपनी मुट्ठी बंद करता है, और आंखों को बार-बार रगड़ता है। इसका मतलब यह है कि शिशु को नींद आ रही है और थकान महसूस हो रही है।

‣ कानों को खींचना -

कभी-कभी बच्चे अपने कानों को खींचते हैं, एक तरह से बच्चा यह संकेत देता है कि उसे नींद आ रही है।

‣ एक टक देखना -

जब बच्चा बहुत थका होता है, तो वह एक टक देखता रहता है। कभी ऐसा भी होता है कि बच्चे ऐसे में खुद ही सो जाते हैं।

‣ पलकें झपकाना -

अगर बच्चा बार-बार पलकें झपकाए तो समझना चाहिए कि बच्चा सोना चाहता है।

‣ हाथ-पैरों को झटकना -

हाथ-पैरो को झटकाना या हाथ पैर चलाना, ऐसा बच्चे तभी करते हैं जब वह थकान महसूस करते हैं।

‣ बार-बार रोना -

अगर बच्चा बार-बार रो रहा है, तो ज़रुरी नहीं कि वह भूखा हो, अक्सर बच्चे नींद की वजह से भी रोते हैं।

‣ कुछ अन्य संकेत -

चिल्लाना और अन्य कई ऐसे लक्षण होते हैैं, जिनसे यह पता चलता है कि बच्चा थका हुआ है। ऐसे लक्षण दिखने पर बच्चे को तुरंत सुलाने की कोशिश करें क्योंकि बच्चा अगर पर्याप्त नींद नहीं लेता है तो उसका असर उसकी सेहत पर पड़ता है।

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बच्चों को सुलाने के आसान तरीके :–

 

– नवजात शिशु को सुलाने का सबसे अच्छा तरीका है, उन्हें गोदी में लेकर सुलाना। शुरुआती कुछ महीनों में बच्चा दिन में सोता है और रात में जागता है, लेकिन जितनी जल्दी हो सके बच्चे की यह आदत बदलनी चाहिए। आप बच्चों को सुबह प्यार से जगायें, उन्हें दूध पिलाएं और फिर अगर संभव हो तो उन्हें बाहर घुमाने ले जाएं। दिन में बच्चे को 1 घंटे की नींद देना ज़रुरी है, साथ ही रात में उन्हें लोरी गाकर सुलाएं।

– 6 महीने बाद बच्चे के व्यवहार में बदलाव आने लगते है, बच्चा दूध के अलावा दाल का पानी, फल, दाल आदि चीजें खाना शुरु कर देता है। कोशिश यह करें कि दिन में बच्चे को खेलने दें और भरपूर पौष्टिक खाना खिलायें फिर रात में समय पर सुलायें।

– 1 साल के बच्चे को सुलाने का यह तरीका है कि उसे लोरी गाकर सुनाये। 1 साल तक के बच्चों को काफी कुछ समझ आने लगता है। इस समय बच्चा नयी चीजें सीखना शुरु करता है, साथ ही खेलना, चलना भी बच्चा इसी उम्र में शुरु कर देता है। ऐसे में बच्चा थकान भी महसूस करता है, कोशिश यह करें कि बच्चे को दिन में सुलायें साथ रात में सोने से पहले अच्छे से खाना खिलायें क्योंकि अगर बच्चा भूखा होगा तो वह ठीक से सो भी नहीं पाएगा।

– बच्चों की सेहत के लिए सबसे ज्यादा ज़रुरी है, हेल्दी डाइट और पर्याप्त नींद। आजकल के समय मे बच्चों को फोन देखकर खाना खाने की आदत हो जाती है, बच्चे आसानी से खाना तो खा लेते हैं। लेकिन फोन देखने की वजह से बच्चों के दिमाग पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इसकी वजह से बच्चों में गुस्सा, चिड़चिड़ापन आ जाता हैं, अगर बच्चों को शुरुआत से फोन की आदत डाल दी जाए, तो बच्चे का मानसिक विकास रुक जाता है। इसलिए जितना संभव हो बच्चे को फोन से दूर रखें, उसकी जगह बच्चे को पार्क ले जाना, खेलने के लिये कई तरह के लर्निंग गेम देना,  ड्रांइग सिखाना, लिखना और भी बहुत सी ऐसी चीजें है जो हम अपने बच्चे के अच्छे भविष्य के लिए कर सकते हैं। क्योंकि अगर बच्चा इस तरह की एक्टिविटी करता है तो वह अच्छी चीजें तो सीखता ही है साथ ही हेल्दी भी रहता है।

बच्चों की अच्छी सेहत और नींद के लिए बरतें यह सावधानी :–

बच्चा जब भी खाना शुरु करें उसे कोल्ड ड्रिंक, जूस, और जंक फूड ना खिलायें क्योंकि अगर बच्चे को इसका स्वाद एक बार लग जाता है तो बच्चा इसे ही खाने की ज़िद करता है। इसकी जगह बच्चे को अच्छा खाना दे, घर का बना जूस, दही, खीर औऱ फल खिलायें।

अच्छी नींद हर उम्र के बच्चों को पर्याप्त मात्रा में लेनी चाहिए, इससे बच्चे का दिमागी विकास भी अच्छे से होता है। बच्चे को समझने की कोशिश करें कि वह कब सोना चाह रहा है, कब उसे भूख लगी है, क्योंकि नवजात शिशु अपनी बात कह नहीं सकते हैं। इसलिए उनके संकेतों को समझना ज़रुरी है, 1 साल तक बच्चा अपने तरीके से आपको यह बात समझाने लगता है कि वह सोना चाहता है।

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निष्कर्ष

अगर आपका बच्चा डे-केयर में जाता है तो वहां बच्चा किस समय सो रहा है इसकी जानकारी अवश्य लें, साथ ही अगर आप अभी मां बनी है तो बच्चे को सुलाने की ज़िम्मेदारी अपने पति को भी दे। क्योंकि आपको भी अपनी सेहत के लिये भरपूर नींद लेना ज़रुरी है। इसके अलावा उपर्युक्त बातों को ध्यान में रखकर आप शिशु को आराम से सुला सकतीं हैं।

 

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