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क्या आप जानते हैं जन्म से पहले भी शिशु स्वाद का मज़ा ले सकते हैं!

गर्भावस्था एक अद्भुत अनुभव है। इससे पहले की आपको यह महसूस हो, आपके भीतर एक नन्ही जिंदगी बढ़ने लगती है। आपका शरीर आपके भीतर पल रही कीमती जिंदगी को संरक्षण और पोषण देने के लिए कई बदलावों से होकर गुजरता है। जैसे-जैसे आपका नन्हा मुन्ना आपके गर्भाशय में विकसित होता है, आपका पेट भी बढ़ने लगता है, आपका हृदय अतिरिक्त खून पंप करता है, आपकी हड्डियाँ और जोड़ बढ़ते वजन को संभालने के लिए तैयार होता है। 

मां का शरीर अजन्मे शिशु को घर, भोजन, आराम और संरक्षण प्रदान करता है। जैसे-जैसे आप अपनी गर्भावस्था में आगे बढ़ती है, आपके अजन्मे शिशु का विकास भी अद्भुत रूप से होता है, और आप यह माने या ना माने ऐसी कुछ चीजें हैं जिनका आनंद आपका शिशु आपके गर्भ में रहते हुए लेता है। इन सभी चीजों से मां और शिशु के बीच मजबूत संबंध बनाने में मदद मिलती है। यह सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपका शिशु गर्भ में स्वाद चख सकता है? क्या आपका शिशु उन सभी चीजों का स्वाद चख सकता है जो आप खाती है? क्या गर्भावस्था के दौरान खाया जाने वाला भोजन आपके शिशु की भविष्य में भोजन संबंधी पसंद या नापसंद को प्रभावित करता है?

क्या जन्म से पहले शिशु भोजन का स्वाद चख सकता है?

जी हां, आपका शिशु जन्म से पहले स्वाद चख सकता है। शिशु 14-16 हफ्तों से स्वाद चखना शुरू कर देता है जब उनके टेस्ट बड विकसित होना शुरू होते हैं। यह है क्रमानुसार उसकी प्रक्रिया:

1-8 हफ्ते - मस्तिष्क की कोशिकाएं मस्तिष्क से शरीर के भिन्न हिस्सों में फैलना शुरू होती है, उससे हिस्से में भी जहां शिशु का मुंह होता है या होगा।

8 हफ्ते - टेस्ट बड उस हिस्से में विकसित होते हैं, जहां शिशु की जीभ होती है। शुरुआती हफ्तों में जो मस्तिष्क कोशिकाएं फैलती है वह इन टेस्ट बड से जुड़ती है। यह टेस्ट बड मीठा, नमकीन, कड़वा, और खट्टा स्वाद को महसूस करने के लिए आवश्यक होते है।

14-16 हफ्ते - टेस्ट छिद्र जीभ पर उत्पन्न होते हैं। शिशु की जीभ की सतह पर यह छोटे छिद्र, भोजन के कणों को टेस्ट बड के संपर्क में आने देते हैं, जिससे स्वाद मस्तिष्क की कोशिकाओं तक जाता है।

गर्भाशय में शिशु स्वाद कैसे चखते हैं?

शिशु अपने आसपास मौजूद एमिनोटिक द्रव को निगलते हैं। जैसे-जैसे शिशु बढ़ना शुरू होता है, वह रोज़ाना अधिक से अधिक एमिनोटिक द्रव निगलने लगते हैं और इससे शिशु का परिचय स्वाद से होता है। यहां तक कि सातवें महीने तक, वह रोज़ एक लीटर एमिनोटिक द्रव को निगलने लगते हैं।

आपका शिशु गर्भाशय में कौन-सा स्वाद चख सकता है?

संक्षिप्त में, एमिनोटिक द्रव का स्वाद मां द्वारा खाए जाने वाले भोजन के स्वाद से सीधे तौर पर जुड़ा होता है। आप जानती है कि जब आप कुछ खाती है, तो आपके आहार में मौजूद पौष्टिक तत्व एमिनोटिक द्रव तक पहुंचने के लिए अपना मार्ग खोज ही लेते हैं। इसी प्रकार, आपका पाचनतंत्र आपके शिशु से भिन्न होता है, परन्तु भोजन के कण एमिनोटिक द्रव तक पहुंच ही जाते हैं। हालांकि स्वाद वैसा नहीं होगा जैसा आपके लिए होता है, लेकिन फिर भी आपका शिशु तेज़ स्वाद, नमकीन, मसालेदार, लहसुन और सबसे महत्वपूर्ण मिठास का स्वाद ले सकते हैं। स्वाद में ज्यादा अंतर नहीं होगा क्योंकि वह हमारी तरह सूंघ नहीं सकते हैं।

क्या यह शिशु की भोजन संबंधी पसंद की ओर संकेत करता है?

यह बहुत ही आम बात है कि शिशु स्वाभाविक रूप से मीठा स्वाद पसंद करते हैं। यह प्राकृतिक तरीका है यह बात सुनिश्चित करने का की आपके शिशु को स्तन का दूध पसंद आता है। लेकिन शिशु के प्रसव-पूर्व चखने के अभ्यास से संबंधित यह बात ध्यान देने योग्य है कि जब वह जन्म लेते हैं, तो उनमें स्वाद और भोजन संबंधी प्राथमिकता की तीव्र भावना होती है। निश्चित रूप से, भोजन का सेवन कुछ महीनों तक शुरू नहीं होता है, लेकिन शोध में पाया गया है कि जो आप गर्भावस्था में खाती है उसका सीधा संबंध भविष्य में शिशु की भोजन संबंधी प्राथमिकता से होता है। उदाहरण के लिए अगर मां ने गाजर का जूस पिया हो, तो शिशु इस स्वाद से परिचित होगा और जब वह ठोस भोजन का सेवन करने लगेगा, तो उसके गाजर को पसंद करने की संभावना अधिक होगी। ठीक इसी तरह अगर मां बहुत मीठा और जंक फूड खाती है, तो शिशु इसी तरह का आहार पसन्द करेगा। इसलिए आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप क्या खा रही हैं।

गर्भावस्था के दौरान आपको क्या खाना चाहिए?

अपने आप को गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित करें। प्रेग्नेंसी फूड पिरामिड को एक बार जरूर देखें।

इस बात को सुनिश्चित करें कि आप संतुलित आहार लें, जिसमें गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित विभिन्न प्रकार के फल, सब्ज़ियाँ शामिल हों।

अगर भोजन पौष्टिक है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप उसे आवश्यकता से अधिक खाएं। अपने आहार को बदलती रहें ताकि आपके नन्हे मुन्ने को अलग अलग स्वाद चखने का अवसर मिले।

नमकीन, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन ना करें। अपने आहार को सामान्य रखें।

हर चीज़ में चीनी ना मिलाएं, जो भी आप खाती है।

तेज़ स्वाद वाले भोज्य पदार्थों को खाएं क्योंकि आपके शिशु के जन्म के बाद इसे याद रखने की संभावना अधिक होती है।

संक्षिप्त में अपने आहार को साफ और मजेदार रखें, ताकि आने वाले सालों में आपका शिशु भी यह पसंद कर सके। कभी-कभार अस्वस्थ भोजन की लालसा को भी आप पूरा कर सकती हैं। 

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