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बिगड़ी नींद से चिड़चिड़ा हो जाता है शिशु, सुलाते वक्त इन बातों का रखें ख्याल


एक नवजात शिशु को बहुत ही ज़्यादा देखभाल की ज़रूरत होती है, क्योंकि वो बहुत कोमल और नाज़ुक होते हैं। सभी माता-पिता अपने शिशु का हर तरह से ख्याल रखना चाहते हैं और इसके लिए वो हर वक़्त अपने शिशु के आराम और पसंद-नापसंद का ध्यान रखते हैं। शिशु अपनी बातों को बड़ों की तरह बोल नहीं सकते और ऐसे में उनकी अनकही बातों को सिर्फ उनके माता-पिता अच्छे से समझ सकते हैं। शिशु के सही विकास के लिए ना सिर्फ उन्हें सही पोषण की ज़रूरत होती है बल्कि उन्हें आराम और अच्छी नींद की भी ज़रूरत होती है। अगर शिशु को पर्याप्त मात्रा में नींद मिलेगी तभी वो शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से स्वस्थ रहेंगे, इसलिए शिशु को अच्छी नींद मिले उसके लिए आपको कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान देना आवश्यक है। आज इस ब्लॉग के ज़रिये हम ऐसी ही कुछ बातों को बताने जा रहे है जिससे ना सिर्फ शिशु को अच्छी नींद मिले बल्कि वो खुश और स्वस्थ भी रहे।

शिशु का बेड हो साफ़

सबसे पहले जिस बेड पर आप अपने शिशु को सुलाने वाले हैं उससे अच्छे से साफ़ कर लें और शिशु का कोई भी खिलौना वहां ना रखें। हर रोज़ शिशु के बेड का चादर बदले ताकि उन्हें कोई इंफेक्शन ना हो। शिशु के लिए जो चादर चुने, ध्यान रहे कि वो मुलायम हो जिससे शिशु को आराम की नींद आए।

कितने देर की हो नींद?

कई बार माता-पिता यह समझ नहीं पाते कि उनके शिशु को कितने घंटो की नींद ज़रूरी होती है, जबकि यह जानना हर माता-पिता के लिए आवश्यक होता है। किसी भी नवजात शिशु के लिए लगभग 16 से 18 घंटे की नींद ज़रूरी होती है, पुरे दिन में 6 से 8 घंटे की और रात को लगभग 8 से 9 घंटे की नींद। अगर शिशु एक महीने का है तो उसे लगभग 12 से 15 घंटे कि नींद की ज़रूरत रहती है। वहीं दो से छः महीने के शिशु के लिए लगभग 14 घंटे की नींद ज़रूरी होती है और एक साल तक के शिशु के लिए 12 से 13 घंटे की नींद आवश्यक है।

शिशु को सुलाने का सही तरीका

हमेशा ध्यान रहे कि शिशु को जिस कमरे में आप सुला रहे हैं उसका तापमान ना ज़्यादा ठंडा और ना ज़्यादा गर्म हो। शिशु को अच्छे कपड़े से लपेटे, लेकिन ज़्यादा ज़ोर से टाइट करके ना लपेटे। हालाँकि ध्यान रहे की शिशु का मुँह और नाक ना ढका हो, नहीं तो उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। कमरे में ज़्यादा अंधेरा ना करें नहीं तो उनकी आँख खुलेगी तो हो सकता है वो डर जाए, और बीच-बीच में आप जाकर एक बार देख लें की कहीं वो नींद से जाग तो नहीं गया। इसके अलावा आप शिशु का डायपर भी हर कुछ देर में चेक करते रहे कि कहीं वो डायपर गीला करके तो नहीं सोया है, क्योंकि कभी-कभी कुछ शिशु डायपर गीला करने के बाद भी शांत सोये रहते हैं इसलिए चेक करना ज़रूरी है। इसके अलावा आप कोशिश करें कि आप शिशु को अपने कमरे में अपने साथ सुलाएं या आप उनके साथ ही सोएं ताकि उन्हें डर ना लगे। 

स्तनपान का रखें ध्यान

हमेशा ध्यान रखें कि आपके शिशु का पेट सही से भरा हो क्योंकि अगर उसका पेट सही से नहीं भरा होगा तो हो सकता है भूख से आपके शिशु की नींद टूट जाए। एक नवजात शिशु के लिए माँ का दूध ही सबकुछ होता है इसलिए आप ध्यान रखें कि शिशु पर्याप्त मात्रा में स्तनपान कर रहा है क्योंकि बहुत बार शिशु दूध पीते-पीते ही सो जाते हैं जिस कारण उनका पेट ठीक से भरता नहीं और इसी वजह से उनकी नींद भी पूरी नहीं हो पाती। इसलिए शिशु के सोने से पहले उन्हें अच्छे से पर्याप्त मात्रा में स्तनपान ज़रूर करा दें।

शोर ना करें

शिशु को सुलाते वक़्त बिल्कुल शोर ना करें और कोशिश करें कि उनके सोते वक़्त कोई भी घर में टीवी ना चलाए या शोर-शराबा ना करे। शिशु की नींद काफी हल्की होती है और थोड़े से शोर से ही शिशु की नींद टूट सकती है। आप सबको बता दें कि यह शिशु के सोने का वक़्त है और इस वक़्त घर में कोई भी शोर-शराबे वाली चीज़ें ना हो।

तय कर दें निर्धारित वक़्त

आप शिशु के सोने का एक रूटीन बना लें, सुबह और शाम दोनों का एक वक़्त तय करके उसी टाइम पर सुलाए। बहुत से माता-पिता शिशु के सोने का एक निर्धारित वक़्त तय कर देते हैं और ऐसे में शिशु को इसकी आदत हो जाती है और उन्हें सुलाना आसान हो जाता है।

आशा करते हैं कि शिशु को सुलाते वक़्त अगर आप इन कुछ ज़रूरी बातों को ध्यान में रखेंगे तो ना सिर्फ आपके शिशु की नींद पूरी होगी बल्कि उसका स्वस्थ मानसिक और शारीरिक विकास भी होगा।

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