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बेबी हार्ट मर्मर : कारण, लक्षण, निदान और इलाज


हार्ट मर्मर एक असामान्य ध्वनि है जो हृदय द्वारा होती है। यह सामान्य तौर पर शिशु के हृदय में रक्त द्वारा तंग स्थान से अपने लिए रास्ता बनाने के दौरान होने वाली अतिरिक्त ध्वनि होती है।

आमतौर पर जब बाल रोग विशेषज्ञ शिशुओं में हार्ट मर्मर बताते हैं तो माता-पिता चिंतित हो जाते हैं। लेकिन माता-पिता के लिए राहत की बात यह है की अधिकतर मर्मर सामान्य होते हैं और इससे शिशु को कोई नुक़सान नहीं होता है। तो यह है वह सभी बातें जो हार्ट मर्मर के बारे में आपको जाननी चाहिए।

हार्ट मर्मर क्या है?

हार्ट मर्मर एक असामान्य ध्वनि है,जो हृदय में विचलन करने वाले रक्त द्वारा की जाती है। यह हृदय द्वारा की जाने वाली लब-डब ध्वनि से भिन्न होता है। हार्ट मर्मर चिकित्सकों द्वारा स्टेथस्कोप का इस्तेमाल करके सुना जाता है। हार्ट मर्मर नवजात शिशुओं और बच्चों में सामान्य है।

हार्ट मर्मर के कारण :

हार्ट मर्मर दो प्रकार के होते हैं–

बेनाइंग मर्मर – इसे फंक्शनल मर्मर,फिजियोलोजिक भी कहा जाता है। सामान्य हृदय बेनाइंग मर्मर प्रदर्शित करता है,जो नवजात शिशुओं और बच्चों में सामान्य है।

असामान्य मर्मर – यह सामान्यत किसी गंभीर समस्या के कारण होता है। शिशुओं और बच्चों में आमतौर पर यह जन्मजात हृदय रोग कार्डिक शंट के कारण होता है। व्यस्कों में यह हार्ट वाल्व समस्या की वजह से हो सकता है।

हार्ट मर्मर के लक्षण :

हार्ट मर्मर के लक्षण इसके कारणों के साथ भिन्न होते हैं। बेनाइंग हार्ट मर्मर में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखता है। असामान्य हार्ट मर्मर हृदय की असामान्यताओं के कारण होता है या जन्मजात कार्डियोवस्कुलर हृदय रोग के कारण फिडिंग की समस्या या नवजात शिशुओं में सामान्य वृद्धि की कमी, चक्कर, सांस लेने में दिक्कत, बेहोशी,छाती में दर्द, हृदय की तेज गति,(palpitations),(lung congestion) और थकान।

निदान :

हार्ट मर्मर नवजात शिशुओं के परीक्षण या सामान्य परीक्षण के दौरान डॉक्टर द्वारा स्टेथस्कोप के इस्तेमाल से इसका निदान किया जाता है। डॉक्टर हृदय की धड़कन को सुनते हैं और विभिन्न कारकों का मूल्यांकन करते हैं जैसे प्रबलता, आवृत्ति, अवधि, समय,,पिच और मर्मर का स्थान। हार्ट मर्मर को 1-6 दर के आधार पर देखा जाता है की यह कितना तीव्र मैं। हालांकि यह एकदम सही नहीं है क्योंकि डॉक्टर के फैसले के आधार पर इसका मूल्यांकन किया जाता है।

हृदय की तेज धड़कन का मूल्यांकन आमतौर पर किया जाता है। हार्ट मर्मर वाले नवजात शिशु सही प्रकार से भोजन नहीं कर पाते हैं और ना सांस ले पाते हैं और जो शिशु अचानक बेहोश हो जाते हैं उनका मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्हें आमतौर पर बाल हृदय रोग विशेषज्ञों के पास भेजा जाता है। कार्डियोलॉजिस्ट व्यक्तिगत और पारिवारिक इतिहास और शारीरिक परीक्षण द्वारा इसे जांचते है। शारीरिक परीक्षण में रक्त चाप, पल्स, रिफ्लेक्स,लम्बाई और चौड़ाई का परीक्षण किया जाता है। साथ ही आंतरिक अंगों की जांच के लिए पाल्पेटिड है,यह जांचने के लिए की वह बड़े हैं या नहीं।

यह जांचने के लिए की शिशु को कोई हृदय रोग या कोई अन्य स्थिति है, इसके लिए डॉक्टर कुछ परीक्षण करते हैं जैसे छाती का एक्स रे, हृदय का अल्ट्रासाउंड (इकोकार्डियोग्राम)। यह देखने के लिए हृदय कैसे बना है और कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है।छाती का एक्स रे हृदय और फेफड़ों का आकार और स्थिति दिखाता है।

इलाज:

बेनांइग मर्मर खुद दिखते हैं और गायब हो जाते हैं। इसमें किसी इलाज की जरूरत नहीं होती है।

अगर हार्ट मर्मर सेप्टल डिफेक्ट के कारण होता है तो करेक्टिव करेक्टिव सर्जरी की आवश्यकता होती है। अगर हार्ट मर्मर,हार्ट वाल्व बीमारी के कारण होता है तो इसे दवाइयों, वाल्व रिप्लेसमेंट या रिपेयर सर्जरी के द्वारा ठीक किया जा सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ प्रकार और समय के अनुसार और शिशु की शारीरिक और समस्त सेहत के आधार पर इलाज कर सकते हैं।

पोषण:

जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त शिशुओं को पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। यह स्तन के दूध और फार्मूला के साथ लिया जाता है। कभी-कभार शिशुओं का वजन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त आहार की आवश्यकता होती है। यह नासोगेस्ट्रिक ट्यूब द्वारा दिया जाता है। यह शिशु की नाक में लगाया जाता है और पेट तक जाता है। फार्मूला और स्तन का दूध इस ट्यूब द्वारा शिशु को दिया जाता है उन्हें पर्याप्त कैलोरी देने के लिए।

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