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अपने वजन को लेकर चिंतित होना व्यर्थ है- उसकी जगह ये करें


 यह बात सच है कि पूरे विश्व की स्त्रियां अपने वजन व शरीर के आकार को लेकर बेहद सचेत रहती है।स्वास्थ की दृष्टि से यह उचित भी है,किंतु इस कथन का आधार यदि खुद से शर्मिन्दा है तो यह समाज के काले सच को बयान करता है,जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं।हमारे मन व दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि एक विशेष आकार (सुडौल) का शरीर ही आकर्षक व सुंदर होता है जबकि अन्य उसकी तुलना में आकर्षक व सुंदर नहीं होते, यह बात एक कथन से ज्यादा तथ्य बन गई है,जो इसपर यकीन करते हैं, वे सभी को इसी वर्ग में रखकर देखते है और जो इस तथाकथित सुंदर आकार की परिभाषा में फिट नहीं होते,वह स्वयं भी इसपर यकीन करके खुद में शर्मिंदा महसूस करते हैं।किसी की आंतरिक खूबसूरती को उसके वजन के आधार पर मापना कहां तक उचित है? इस तथ्य की असलियत यह है कि सुंदरता के यह पूर्व-निर्धारित मानदंड परदे की तरह होते हैं,जिससे हम कृत्रिम सौंदर्य प्रसाधनों का सहारा लेकर अपनी वास्तविकता छुपाना चाहते हैं।

 

 इंसान को उसके रंग, लिंग, वजन व कद के आधार पर वर्गीकृत करना इंसानियत को शर्मिंदा करने के बराबर है। इस प्रकार की धारणाओं पर यकीन कर व्यक्ति खुद अपना अस्तित्व खो बैठता है। लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगें ,यही सोचकर हम अपने वज़न को बढ़ाते और घटाने की सोचतें है | अपने किशोरावस्था के वर्ष हम खुद को अपने रूप में अपनाने की जग़ह लोगों को खुश और प्रभावित करने में बीता देते हैं |हमने हमेशा अवास्तविक मानदंडों पर खुद को खरा उतारने की कोशिश की और यही हमारी सबसे बड़ी गलती थी। हमने हमेशा दूसरों जैसा बनने की चाह की,कभी किसी सेलिब्रिटी की तरह खुद को संवारा ,कभी सहपाठियों की तरह, तो कभी परिवार में किसी की नक़ल करने की कोशिश में ही लगे रहे। ईश्वर द्वारा सबको दी गई अनोखी व अलग खुबसूरती,जिसमें गुण व दोष दोनों है,इसकी सराहना हमने कभी नहीं की।

अपने वजन को लेकर सचेत होने का कारण आपके लिए आपका स्वास्थ्य होना चाहिए ना कि किसी और का आपके वजन के प्रति दृष्टिकोण। चंद असंवेदनशील लोगों की वजह से आप क्यों अपने वजन को लेकर चिंतित हो, जबकि अनेक लोग आपको वैसे ही स्वीकारते हैं,जैसे आप हैं, इसलिए याद रखिए वजन कम या ज्यादा करने का आधार स्वास्थ्य है शर्मिंदगी नहीं।

नीचे कुछ ऐसे लोगों के विचार बताए गए हैं जिन्होंने वजन के कारण अपने शरीर पर होने वाली शर्मिंदगी को स्वीकारा है–

" मुझे मेरे शरीर पर सबसे ज्यादा शर्मिंदा करने वाली व्यक्ति मेरी मां है, उनके अलावा कभी किसी ने मुझे मोटा नहीं कहा।"

" पुरूष भी अपने शरीर के कारण शर्मिंदगी महसूस करते हैं लेकिन स्त्रियों से ज्यादा नहीं।"

" मेरे पास सुंदर होंठ, बेदाग त्वचा व सुडौल शरीर नहीं है जैसा कि आमतौर पर महिलाओं को परिभाषित किया जाता है। इसलिए मुझे लगता है,मैं खूबसूरत नहीं हूं और शायद मैं कभी खुद से प्यार नहीं कर पाऊंगी।"

" जैसे-जैसे मौसम सुहावना होता है,मैं तनाव महसूस करती हूं क्योंकि मैं शार्टस, टैंक टॉप व बाथिंग सूट नहीं पहन सकती,क्योंकि मेरे शरीर पर कई दाग व निशान हैं जिस कारण मैं शर्मिंदा महसूस करती हूं।"

शरीर पर शर्मिंदगी करना ठीक नहीं है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि व्यक्ति का आकार क्या है,सही मायने में इंसान का महत्व है वजन व आकार का नहीं।

याद रखें कि वज़न आपके लिए चिंता का कारण तब होना चाहिए जब इसका असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ रहा हो | लोगो की बातों को अनदेखा कर अपने खूबियों को सराहें | आपका आत्म विश्वास आपको नयी ऊँचाइयो पर ले जायेगा |

 

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