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अपने शिशु को सोने कि ट्रेनिंग देने के दौरान इन सात बातों से बचें

  शिशु को सोने कि ट्रेनिंग देना नए माता पिताओं के लिए मुश्किल भरा काम होता है, हालांकि इस दौरान गलती करना गलत नहीं है, क्योंकि यह परवरिश कि प्रक्रिया का हि हिस्सा है​। लेकिन हमें दूसरों की ग़लतियों से भी सबक लेना चाहिए, क्योंकि इससे आप उन ग़लतियों को करने से बच सकते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं सात बातें जो शिशु को सोने कि ट्रेनिंग देने के दौरान ना करें:

  शिशु के सोने का समय निर्धारित ना करना – यदि आप शिशु को रोज एक निर्धारित समय पर सुलाएंगे, तो रोज़ाना उस समय पर उसे अपने आप नींद आने लगेगी और वह समय से सो जाएगा, इसलिए शिशु के सोने का समय निर्धारित करें क्योंकि इससे आपको भी शिशु को सोने कि ट्रेनिंग देने में आसानी​ होगी व नियमित समय पर सोने की अच्छी आदत सारी उम्र बनी रहेगी।

 

देर से सोने कि आदत– अगर शिशु महीने में एक या दो बार देर से सोता है तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन अगर उसे रोज़ाना यह करने कि आदत पड़ेगी तो यक़ीन मानिए, यह उसकी उम्र-भर कि आदत बन जाएगी। इससे उन्हें थकावट होगी,व वे आलसी बनेंगे, इसलिए शिशु के लिए 10 घंटे कि नींद आवश्यक है जिससे वह अधिक सक्रिय और ताज़ा महसूस करेंगे।

सुलाने के लिए गति(motion) का प्रयोग करना- यह स्वाभाविक है कि गति(motion) के कारण नींद आती है, इसलिए सफर के दौरान कार या फ्लाइट में हमें नींद आने लगती है, लेकिन शिशु को सुलाने का यह तरीका सही नहीं है। इसका लगातार प्रयोग करने से शिशु को आरामदायक नींद नहीं आएगी व उसकी नींद बार-बार टूटेगी, इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि बेशक उसे हिलाते नींद लाने का प्रयास करें परंतु उसे नींद बिस्तर या पालने पर ही आए। अगर शिशु सोने में आनाकानी करता है तो उसे सुलाने के लिए यह तरीका उपयुक्त है।

 

ध्यान भटकाने वाला वातावरण– अगर शिशु के आसपास का माहौल व वातावरण ध्यान भटकाने वाला है जैसे गाने व घूमने वाले खिलोने और चमचमाती रोशनी, तो निश्चय ही वह सोएगा नहीं क्योंकि इससे वह सोने के मूड से हटकर खेलने के मूड में आ जाएगा।

कमरे कि अनुचित स्थिति– यह माना जाता है कि शिशुओं को अंधेरे से डर लगता है, ऐसे में उन्हें तेज रोशनी​ (night lights) सुलाने में सहायक होती है, लेकिन हकीक़त यह है कि अंधेरे व ठंडे कमरे शिशु के सोने के लिए सबसे बेहतर होते हैं। अंधेरे से डर जैसी समस्या को समझा बुझा कर दूर किया जा सकता है। लेकिन अंधेरे कमरे में शिशु को सोने में ज्यादा समय नहीं लगता है।

उनके नखरों पर ध्यान न दें -आमतौर पर अगर शिशुओं के सोने का मन ना हो, तो वह आपका ध्यान भटकाने के लिए नखरें करते हैं व रोते है। ऐसे में उनके रोने व नखरों पर ध्यान न दें व समयानुसार उन्हें सुलाए। ऐसा करके आप उन्हें सोने कि ट्रेनिंग देने में सफलता ज़रूर पाएंगे।

लगातार तांक-झांक ​करना– आपको शिशु की फ़िक्र होती है इसलिए आप ऐसा करते हैं, लेकिन आपके ऐसा करने से शिशु जाग सकता है और इससे उसे ठीक से नींद ना आने कि समस्या हो सकती है। जिससे वह आलस व थकान का अनुभव करता है, इससे उनके कार्य करने कि क्षमता भी कम होती है। कभी-कभार उन्हें जाँचना गलत नहीं है लेकिन यह काम बहुत शांति व स्थिर होकर करें।

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