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अपने शिशु के साथ यह बिल्कुल ना करें और ना किसी को करने दें


आप को मातृत्व का नया नया अनुभव हो रहा है। ऐसे में आपको कई शंकाएं होती हैं जिनका जवाब आप पाना चाहती हैं। आप जानना चाहती होंगी की कब शिशु को खाना खिलाएं, कितनी बार खिलाएं, कितनीं बार शिशु को टॉयलेट ले जाएँ? क्या शिशु को गर्म पानी से नहला सकते हैं?

इन सभी दुविधाओं को दूर करने के लिए हमने आपके लिए कुछ चुनिंदा बातें लिखीं हैं जिनसे आ अपने शिशु का ख्याल अचे से रख सकें।

1. बच्चों के प्रति लापरवाही न करें

 

 

बच्चे आपका प्यार और समय पाना चाहते हैं। दुनिया की कोई भी कीमती वस्तु आपकी जगह नहीं ले सकती। अगर आपका शिशु आपका समय नहीं पा रहा है तो उसे किसी चीज़ में मन नहीं लगेगा और वह आपका ध्यान केंद्रित करने के लिए उधम मचा सकता है, रोना, चिल्लाना आदि। इसलिए आप शिशु पर ध्यान अवश्य दें। इस प्रकार आपके और शिशु के बीच में मज़बूत रिश्ता बनेगा।

2. बच्चों को रोने न दें 

 

कल्पना कीजिये की आपकी आँखों का तारा किसी कारणवश रो रहा है, आप ऐसा बिलुल नहीं चाहेंगी की वह रोये। बेचारा बच्चा। रो रो कर उसकी आँखें लाल और सूज जाएँगी। इसके बाद वह थक जायेगा और शायद भूखा सो जाये। इसलिए बच्चे के आँखों में कभी आंसू न आने दें। इसके अतिरिक्त उसके इशारे को समखने की कोशिश करें की वह क्यों रो रहा है ?भूख, टॉयलेट जाने या फिर नैपी बदलने के लिए।

 

3. बच्चों को अकेला न छोड़ें

 

 

किसी को भी अकेला छोड़ना एक प्रकार का दंड के समान है। बातचीत और एक दूसरे का साथ देना इंसानियत का सबसे पहला उसूल है। आप बेबी को कभी भी अकेला न छोड़े क्योंकि इससे उसमें भय आ जायेगा। वह डरपोक हो सकता है और उससे लोगों से घुलने मिलने में वक्त लगेगा। शिशु घबरा जायेंगे अगर आप उनको लम्बे समय के लिए अकेला छोड़ देंगे। इसलिए हमेशा उनका शुरुवाती वर्षों में उनके साथ रहें। जितना हो सके उनका ख्याल खुद रखने की कोशिश करें और उन्हें दाई या नैनी के भरोसे न छोड़ें । यह पल दोबारा लौट के नहीं आएंगे और आप उन्हें बढ़ते हुए देख सकती हैं। इनकी तुलना दुनिया की किसी अन्य चीज़ से नहीं कर सकते।

4. शिशु को स्पर्श करने का मौका न गवाएं

 

 

जो भावनाएं हमारे शब्द बयान नहीं कर सकते उन्हें हम आंसुओं या स्पर्श के माध्यम से दूसरों तक पहुंचाते हैं। इसलिए हर माँ को अपने शिशु को ज़्यादा से ज़्यादा प्यार दुलार अपनी मार्मिक स्पर्श से देना चाहिए। इससे शिशु और आपके बीच का रिश्ता गहराता जायेगा। शिशु आपकी गोद में आकर खिल उठेगा और उसकी हंसी देखने लायक होगी। आप उसको गोद में बैठायें, लेटायें, गुदगुदाएं, मालिश करें या फिर हलके हाथों से सेहलायें, जो भी करें बस शिशु को अपना स्नेहभरा स्पर्श देती रहें।

5. बच्चों पर अत्यधिक क्रोध न करें

 

 

शिशु की शुरुवाती उम्र में उसपर ज़रूरत से ज़्यादा क्रोध न करें। उनके ऊपर हाथ उठाना, चिल्लाना, दंड देना बहुत ही बुरा होता है। वे मासूम होते हैं और आपको समझना चाहिए की वे जो भी कर रहे हैं यह उनकी नादानी है। इसलिए आप बड़ी हैं, समझदार हैं तो आपको ठन्डे दिमाग से काम लेना चाहिए। आपके क्रोध करने से शिशु भयभीत हो जाता है, आपके हाथ उठाने से वे आपको क्रूर, निर्दय और कठोर समझते हैं। कुछ सैलून बाद वे आपकी इज़्ज़त नहीं करते और बड़े होने पर उनको आपसे जुड़ी कड़वी यादें रह जाएँगी। इसलिए प्यार से समझाएं और कभी भी गुस्से को शिशु पर मत उतारें। दुनिया तो है ही सताने के लिए, एक माँ के रूप में आप उनपर भरपूर प्यार बरसाएं।

इस ब्लॉग से समझिये और सीखिए: हर स्थिति में धैर्य से काम करें। इस पोस्ट को अपनी अन्य सहेलियों में शेयर करें

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