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अपने शिशु के रोने का कारण जानें


शुरुआत के कुछ महीनों में आपका शिशु केवल खाता, सोता और रोता है। क्योंकि वह बोल नहीं सकता है और इसलिए रो कर आप से संप्रेषण यानी अपनी बात कहता ह। तो अगर आप यह समझ जाएं की वह क्या चाहते हैं और कब रोते हैं, तो यह आपकी जिंदगी को थोड़ा आसान ज़रूर बना सकता है। इस बात का ध्यान रखें की कभी-कभी वह इसलिए रोते हैं क्योंकि वह सिर्फ रो ही सकते हैं।अगर आपने सभी चीजें सही की हैं और फिर भी आपके शिशु का रोना बंद नहीं हो रहा है, तो ज़्यादा तनाव ना लें।

यह है कुछ आम कारण जिनकी वजह से शिशु रोते हैं और कैसे आप पहचान सकतीं हैं कि इसका मतलब क्या है?

1. भूख की वजह से रोना

अगर उनका रोना बंद नहीं हो रहा है तो यह भूख के कारण भी हो सकता है। तेज आवाज़ में रोने का मतलब अधिकतर यही होता है कि उन्हें भूख लगी है। अगर रोने के साथ-साथ वह आपके स्तनों तक पहुंचने, अपनी उंगलियों को चूसने या मुंह से चूसने की आवाज़ निकाले और अगर आपको उन्हें खाना खिलाए तीन चार घंटे से ज्यादा हो गया है तो इसका निश्चित ही अर्थ यह है की उन्हें भूख लगी है। इसलिए बेहतर होगा कि उनके इस रोने पर आप जल्द से जल्द प्रतिक्रिया दें, वरना आपका शिशु और उत्तेजित हो सकता है। अगर वह ज्यादा नाराज़ हुए तो वह दूध के साथ हवा भी निगल लेंगे जिससे वह और ज्यादा रोने लगेंगे।

2. थकावट की वजह से रोना 

 इस तरह का रोना बहुत ही असहाय किस्म का रोना होता है और बहुत ही अस्पष्ट और कराहने जैसा लगता है। अगर आपके शिशु की आँखें बंद हैं लेकिन वह फिर भी बेचैन है या लगातार अपनी आंखों को रगड़ रहा है जो की लाल और बेजान दिख रहीं हो, तो इसका मतलब यह है की वह थके हुए हैं। सभी तरह के रोने में, उन्हें शांत कराने के लिए यह रोना सबसे आसान वाला है। आपको सिर्फ इतना करना है कि शिशु को उसके मनपसंद खिलौने के साथ बिस्तर पर लेटाएं या उसे अपने बगल में लेटाएं और अपने कंधे पर सोने दें।

3. शोर-शराबे की वजह से

कभी-कभार आपका शिशु रो कर आपको यह बताना चाहता है कि उनके आस-पास बहुत शोर-शराबा है जिससे वह असहज महसूस कर रहे हैं। इस तरह का रोना आमतौर पर चिड़चिड़ापन और कराहने वाला होता है और इसमें शिशु जहाँ शोर-शराबा हो रहा हो, उस जगह की विपरीत दिशा में मुंह फेर कर रोता है। ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए! वह यह है कि कुछ देर के लिए शिशु को शोर-शराबे से दूर किसी शांत वातावरण में ले जाएं और उसे शांत कराने की कोशिश करें।

4. ऊबने की वजह से

 इस तरह का रोना धीरे-धीरे शुरू होता है फिर हल्की आवाज़ और अंत में जोर-जोर से। इसकी शुरुआत इससे होती है कि पहले शिशु पालने से खेलता है या फिर अपने आसपास की चीजों पर हाथ मारता है। यह आप तय कर सकती हैं की आपको इससे कैसे निपटना है। अगर आप अपने शिशु को बिगाड़ना नहीं चाहती हैं और उन्हें खुद को कैसे शांत रखना है यह सिखाना चाहती है तो आपको अपने दिल पर पत्थर रखकर इसे नज़रअंदाज़ करना होगा। अगर आपको यह बहुत ही निष्ठुर लगे, तो आप अपने शिशु को गोद में उठाकर उसके साथ खेल सकती हैं जबतक की वह चुप ना हो जाए।

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