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अपने पति से झगड़ा करते समय ये 10 चीज़े भूलकर भी न करे

ये तो कोई छुपी हुई बात नही है कि हर युगल कभी न कभी झगड़ते तो है ही| कभी-कभी तो बात शांति से सुलझ जाती है, पर कभी कभी बातें बड़े झगड़े में बदल जाती हैं। कहा जा सकता है कि, लड़ाई-झगड़ा या बहस करना मानव प्रकृति एक का भाग है| यद्यपि, कुछ ऐसी बातें हैं जो निश्चित रूप से झगड़े के दौरान हमसे बाहर नही आनी चाहिए। ये एक रिश्ते को बिगाड़ सकती हैं और कोई भी नही चाहता कि छोटी सी बात उस हद तक पहुँच जाए कि रिश्ते में खटास आ जाए। फिर भी, 'लड़ने-झगड़ने के' के कुछ सभ्य तरीके हो सकतें हैं। लड़ें पर लड़ाई को दिल से न लगाएं ! अपनी परेशानियों का ,अपने जरूरतो का हल खोजें क्योकि यही आपके झगडे की वज़ह थी| शादी के खट्टे मीठे पलो को अपने जीवनसाथी के साथ भरपूर जिये यही हमारी कोशिश है,यही हमारा उद्देश्य है कि हम उन विवादों से भरे पलों की जटिलता को आपके लिए थोड़ा सुलझा दें |

नीचे दिए गई सूची मे ऐसी कुछ चीज़े के बारे मे बताया गया है, जिसे आपको अपने पति के साथ लड़ते समय बिलकुल भी नहीं करनी चाहिए।

1. एक-दुसरे को अलग-अलग नाम पुकार कर चिढ़ाना।

जैसे ही कोई भी बहस अधिक तीव्र होती जाती हैं, हर कोई उसी बात पर आ जाता है जो हमने बच्चों के रूप में किया था - 'नेम कॉलिंग' या नाम लेकर चिढ़ाना। यद्यपि, हमें ये अहसास होना चाहिए कि हम अब बच्चे नहीं रहे। इसके अलावा, एक वयस्क के रूप में अपमान जैसे कि "आप एक * कठोर शब्द  *" सुनना किसी को भी कभी भी अच्छा नहीं लगता है। विशेष रूप से तब जब ऐसा उस साथी की ओर से आ रहा हो जिनके लिए आपके मन मे प्यार हैं और उनपर हम गहराई से विश्वास करते हो। इस तरह के अपमान एक व्यक्ति को लंबे समय तक याद रहते हैं और ये आपसी संबंध के लिए भी बेहद हानिकारक हो सकते हैं

2. पुरानी बातों को फिर से बाहर न निकाले।

भले ही बहस कितनी भी क्यों न बढ़ जाए, भले ही इस बहस का किसी पुरानी चीज़ से कोई लेना-देना हो या ना हो, अपने पति की पुरानी ग़लतियों को बाहर निकालना सही नही है। संभावना यह है कि आपके पति पहले से ही खुद को उस बात पर दोषी मान रहें हो जो उन्होने अतीत में की थी, और वे बिलकुल भी नही चाहेंगे कि आप उस बात को बहस के दौरान बाहर निकाले। चीजों को दिल पर न लेना और भूल जाना सीखें। जब भी किसी रिश्ते की बात आती है तो अतीत को पीछे छोड़ना हमेशा ही अच्छा होता है।

3. साईलंट ट्रीटमेंट छोडिए और एक-दूसरे से बात कीजिए।

किसी व्यक्ति से बहस होने पर उससे चिढ़कर उससे बात न करना बहुत ही पुरानी और सामान्य प्रतिक्रिया है, पर यह उतनी ही अप्रभावी भी है। यदि कोई व्यक्ति कुछ महसूस कर रहा है, परंतु वो उस बारे में खुलकर बात नहीं कर रहा हो, तो किसी भी साथी के लिए यह पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि सामने-वाले की समस्या क्या है? यदि वह समस्या से ही अनजान हो तो, वो समस्या कैसे सुलझा पाएगा। जब आप किसी के साथ एक रिश्ते में होती है, तो इतना समझना महत्वपूर्ण है कि आपका साथी आपका मन नहीं पढ़ सकता है ,और इसलिए आपको उन्हें यह बताना चाहिए कि आप कैसा महसूस कर रहीं हैं और आपस मे बात कर के पता करने की कोशिश करें कि चीजों को बेहतर कैसे बनाया जाए।

4. कभी भी अस्पष्ट तरह के आरोप  न लगाए।

कुछ वाक्यांशों का प्रयोग जैसे कि "आप कभी मेरी मदद नहीं करते हैं" या "आप हमेशा ऐसा ही करते हैं" केवल आपके साथी को और भी परेशान कर देते हैं, भले ही उन्होने ऐसा किया हो या न किया हो और ऐसे आरोपों का तो बहस से कुछ लेना-देना ही नही होता है। इसके अलावा, यह केवल दोनों पक्षों को और भी आरोप-प्रत्यारोप के चक्र  की ओर ले जाता है, और फिर बहस हद से ज़्यादा बढ़ जाती है और आप पाते है कि मुख्य तनाव की विषय वस्तु से दूर किसी और बात के लिए लड़ रहे होतें है जबकि आपके विवाद की असली वजह वहीँ की वहीँ छूट गयी है|

5. बहस की मुख्य वजह से न भटके।

एक बहस में  किसी भी अन्य,असंबंधित मुद्दे की ओर बढ़ना बहुत ही आसान होता है। आप बहस के मुद्दे पर बने रहने का प्रयास करें क्योंकि ऐसा करना इस मुद्दे को शीघ्र हल करने का सबसे अच्छा तरीका होता है और बेकार मे बहस बढ़ने की संभावना भी कम हो जाती है।

6. लड़ते समय हद पार न करें।

हम सभी जानते हैं कि हमें अपने साथी कि कुछ ऐसी चीजें पता होती हैं जो हमारे साथी को नुकसान पहुँचा सकती हैं। यह एक ऐसे बटन की तरह होता है जिसे आप जानते हैं कि आपको दबाना नहीं चाहिए, लेकिन आप बहस की गर्मी में वैसा ही कुछ कर बैठतीं हैं। यदि आप ऐसा करतीं हैं, तो निश्चित रूप से यह ऐसी चीज़ है जिसपर आपको सावधान रहने की ज़रूरत है| हम सभी जानते हैं कि आप अपने साथी को चोट नहीं पहुंचना चाहती हैं, इसलिए भुलकर भी आप ऐसा न करें। जब वे पहले से ही परेशान हो तो ऐसे मे उन्हें ऐसी बातों से नुकसान पहुँचाना गलत है, तो ऐसी चीज़ो को बहस के दौरान बाहर न लाने मे ही भलाई है।

7. कभी भी उनके रूप पर टिप्पणी न करें।

यह एक आम रणनीति है ,जो कई जोड़ें अपनाते है, बिना सोचे-समझे कि यह कितनी हानिकारक हो सकती है। अपने साथी के  रंग-रूप के बारे अपमानजनक बातें न करें, यह अप्रासंगिक, अनावश्यक है। इस बात पर ध्यान दें कि बहस के बीच में आप कुछ गलत न बोल दें जैसे कि - उन्होने कितने बालों को खोया है या उनका वजन बढ़ गया है। आप इन मुद्दों को अच्छी तरह से किसी अन्य समय में भी चर्चा कर सकते हैं। हालांकि, अभी उन्हें यह बताने का उचित समय नहीं है।

8. कभी भी अन्य जोड़ों के साथ तुलना न करें।

याद रखें कि आपका रिश्ता आपका खुद का है,यही चीज़ इसे अनोखा बना देती है। अपने आप को दूसरे किसी जोड़े के साथ न  तोलें।  वे सब अलग-अलग लोग हैं और इसलिए, वे चीजों के बारे में अलग तरह से सोचते है। किसी भी जोड़े को एक-दूसरे की तुलना करने की कोई ज़रूरत नहीं है ।

9.  जब तक ज़रूरत न हो,एक-दूसरे के परिवारजनों को बहस से बाहर रखें।

जब तक कि बहस परिवार वालों के बारे में नहीं है, अपने साथी के परिवार को बीच मे न लाए। परिवार और दोस्तों का विषय शायद एक व्यक्ति के लिए एक संवेदनशील विषय हैं और उन्हें बीच मे लाकर केवल सामने वाले व्यक्ति को आप अधिक आक्रामक बनायेंगी |। इस बारे में इस तरह से सोचें, अगर आपके पति आपके प्रियजनों के बारे में गलत बात करते हैं तो आपको कैसा लगेगा? यदि आप उनसे ऐसा कुछ नहीं सुनना चाहती हों, तो उनके प्रियजनों को भी अपने बहस से दूर ही रखें।

10. हमेशा अपने साथी से इज़्ज़त से बात करें।

कभी-कभी बहस बहुत तीव्र हो जाती हैं और चीज़े पहले से ही हाथ से बाहर जा चुकीं हो, तब भी आपको आपके साथी के साथ सम्मान के पेश आना चाहिए। एक बहस कोई ऐसा कारण नहीं है जिससे कि आप एक दुसरे के सम्मान को ताक पर रख दें । याद रखें, यह बहस समाप्त हो जाने पर सामने वाला व्यक्ति आपका पति / पत्नी ही रहेगा, और आपको आगे भी इनके साथ ही जीवन बिताना है | है। उनकी  निंदा करने और उनको नीचा महसूस कराने के चक्कर में उनको ऐसा महसूस कराना जैसे कि वे किसी भी सम्मान के योग्य नहीं हैं, बिलकुल गलत है।

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