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अपने नवजात के इन समस्याओं को समझें - जन्म के कुछ हफ्ते होती हैं उन्हें ये परेशानियां


एक शिशु ना सिर्फ माता-पिता के लिए बल्कि पुरे परिवार के लिए बहुत खास होता है। हर कोई शिशु के देखभाल में लग जाता है क्यूंकि वो बहुत नाज़ुक और कोमल होते हैं और वो अपनी बातें और परेशानियां बोलकर व्यक्त नहीं कर पाते। एक शिशु के लिए गर्भ से निकलने के बाद यह दुनिया बिल्कुल नई होती है, गर्भ के अंदर उनके लिए काफ़ी छोटी और सिमित होती है पर जब वो गर्भ से बाहर आते हैं तो उनके लिए हमारी दुनिया काफ़ी बड़ी और अलग होती है। इसी कारण उन्हें जन्म के शुरूआती हफ्ते में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है और यही कुछ बातें हम आपको इस ब्लॉग के ज़रिये बता रहे हैं।

1. स्तनपान में मुश्किल 

 

जब शिशु जन्म लेता है तो सबसे पहले उसे माँ का दूध यानी स्तनपान कराया जाता है, परन्तु इस वक़्त शिशु सही तरीके से स्तनपान नहीं कर पाता है क्यूंकि वो बहुत छोटा होता है और उसे ठीक से स्तनपान करना नहीं आता। इसके अलावा शिशु बाद में भी स्तनपान करने का सही तरीका भूल जाते हैं और इस वजह से उनका पेट ठीक से नहीं भरता और वो रोना शुरू कर देते हैं। इसके अलावा कभी-कभी शिशु स्तनपान करते-करते भी सो जाते हैं और उनका पेट ठीक से नहीं भरता और वो सोकर उठने के बाद रोने लगते है और अपने शिशु को रोता देख किसी भी माँ के दिल को ठेस पहुंचेगी इसलिए यह वक़्त सिर्फ शिशु के लिए नहीं बल्कि एक माँ के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है, शिशु को यह परेशानी एक दो हफ्ते रहती है। इसलिए अगर आपका नवजात शिशु ज़्यादा रो रहा है तो उसका भूखा होना भी एक वजह सकता है।

2. कॉर्ड स्टंप या गर्भनाल स्टंप 

कॉर्ड स्टंप भी शिशु के लिए काफ़ी तकलीफदेह होता है हालाँकि यह एक या दो हफ़्तों में गिर जाता है लेकिन उससे पहले इसकी देखभाल की खासी ज़रूरत होती है। शिशु को कपड़े पहनाते वक़्त इसका ख़ास ध्यान रखना चाहिए नहीं तो अगर गलती से भी शिशु के कॉर्ड स्टंप में चोट लग गई तो उससे शिशु को काफ़ी पीड़ा हो सकती है इसलिए शिशु को हल्के कपड़े पहनाये ताकि इसमें हवा लगती रहे और डॉक्टर से परामर्श लेकर कोई एंटीसेप्टिक लगाएं ताकि शिशु को इन्फेक्शन ना हो और यह जल्दी सूखे।

3. नींद से जुड़ी समस्याएं

शिशु गर्भ में बहुत ही आराम की स्थिति में रहते हैं और जब वो बाहर आते हैं तो उन्हें बहुत सी चीज़ें जैसे रौशनी और शोरगुल का सामना करना पड़ता है और इसी कारण से वो ठीक से अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते और चिड़चिड़े होकर रोने लगते हैं। शिशु की नींद बहुत पतली होती है थोड़ी सी आहट से उनकी नींद खुल जाती है इसलिए शिशु को सुलाने के बाद बिल्कुल भी शोरगुल ना करें।

4. नैप्पी गीली करने की समस्या

शिशु शुरू-शुरू में बहुत ज़्यादा नैप्पी गीले करते हैं और अगर आपके शिशु का जन्म ठंड के मौसम में हुआ है तब तो और ज़्यादा यह समस्या होती है, इसलिए अपने शिशु की नैप्पी हर थोड़े देर में चेक करें क्यूंकि कभी-कभी शिशु गीली नैप्पी होने के वजह से भी रोते हैं और गीली नैप्पी के वजह से उन्हें ठंड या इन्फेक्शन या रैसेज़ होने का भी खतरा रहता है। इसलिए हर थोड़ी देर में नैप्पी ज़रूर चेक करें।

5. लगातार रोना

कोई भी शिशु अपनी बात बोलकर व्यक्त नहीं कर पाता और इसी कारण अगर उसे कोई समस्या या तकलीफ़ जैसे पेट दर्द, भूख या नैप्पी गीली करे तो वो रोना शुरू कर देते हैं या कभी-कभी नींद आने से भी शिशु रोने लगते हैं इसलिए अगर आपका शिशु रो रहा हो तो उसे गोद में लेकर घुमाएं । इसके अलावा अगर आपका शिशु लगातार रो रहा है तो एक बार डॉक्टर के पास ज़रूर जाएँ क्यूंकि हो सकता है आपके शिशु को कोई गंभीर तकलीफ़ हो रही हो।

6. शौच की समस्या

शिशु के जन्म के बाद शुरू-शुरू में शिशु को काले या हरे रंग की शौच होती है लेकिन इसमें परेशानी वाली कोई बात नहीं है। इसका कारण यह है की शिशु अपने माँ के गर्भ में कई चीज़ें जैसे आम्नियोटिक फ्लूईड, म्यूकस, कोशिकाएं  निगलता है और उसी वजह से शिशु का शौच काले या हरे रंग का होता है इसलिए इससे घबराएं ना।

यह कुछ चीज़ें है जो एक नवजात शिशु को शुरूआती कुछ हफ़्तों तक परेशान करती है इसलिए घबराएं नहीं और इनका ध्यान रखें क्यूंकि वक़्त के साथ-साथ शिशु की ये तकलीफें दूर हो जाएंगी। 

हैप्पी पैरेंटिंग !

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