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अपने जुड़वां बच्चों में अंतर कैसे करें- जानिये


 टेलिपैथी

 

जुड़वाँ बच्चों को जन्म के समय अलग कर दिया जाए, तो वह समान जीवन जीते हैं। उनमें टेलिपैथी द्वारा संप्रेषण(communication) करने की क्षमता होती है। कई मामलों में यह सामने आया है कि दो अलग देशों में होने पर भी जुड़वाँ बच्चे एक दूसरे की भावनात्मक स्थिति को जान लेते हैं। विचारों का आदान-प्रदान कर पाना भी जुड़वाँ होने का अहम पहलू है। कुछ चुनिंदा मामलों में, एक दूसरे से दूर होने के बावजूद, वह एक दूसरे पर आने वाले खतरों को महसूस कर लेते हैं।

 

अपनी अलग भाषा

अधिक्तर जुड़वाँ बच्चों में यह पाया गया है कि वह एक दूसरे से संप्रेषण करने के लिए खुद ही एक नई भाषा खोज लेते हैं। इससे पहले की वह बोलना सीखें, आप यह देखेंगें कि वह आपस में अज्ञात शब्दों के माध्यम से बातें कर रहे हैं, जिन्हें आप नहीं समझ सकते हैं।

वूम्ब बडिज्

जुड़वाँ बच्चे सच्चे दोस्त बनने का सफर माँ के गर्भ से ही शुरू कर देते हैं। वह जब गर्भ में होते हैं तभी एक दूसरे से बातें करना शुरू कर देते है। गर्भ में वह एक दूसरे का हाथ भी पकड़ते हैं।

पक्के दोस्त (BFF)

जुड़वाँ बच्चे एक दूसरे के पक्के दोस्त होते हैं, भले ही वह स्कूल जाकर कितने भी दोस्त बनाएँ लेकिन अंत: वह एक दूसरे के साथ ही रहना पसंद करते हैं।उनके एक दूसरे के साथ अच्छा महसूस करने का कारण यह नहीं होता कि वह एक जैसे दिखते हैं बल्कि यह होता है की वह एक दूसरे के व्यक्तित्व को पूरा करने और सराहने की क्षमता रखते हैं।

जुड़वाँ बच्चों में अंतर कैसे करें? नाभि!

जुड़वाँ बच्चों में अंतर करने का एकमात्र तरीका है, उनकी नाभि को जाँचना। कुछ माताएँ जुड़वाँ बच्चों में भ्रमित हो जाती है, ऐसे में उनके कपड़ों को उठाए और जाँचे। आपके जुड़वाँ बच्चे भी एक दूसरे की शर्ट उठाकर यह जाँच सकते हैं कि वह वास्तव में जुड़वाँ हैं।ज़रा सोचिए ऐसा करते वक़्त वह कितने प्यारे दिखते होंगें।

 

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