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अपने गर्भ में पलने वाले बच्चे की नापसंद को जानें


जब लोग गर्भावस्था के बारे में सोचते हैं तो सामान्य तौर पर वह इसे मां, पिता और उस छोटे मनुष्य से जोड़ते हैं,जो मां के पेट में बढ़ता है। मां इन बातों को लेकर बहुत सचेत होती है की क्या खाए और क्या ना खाए। पिता इस‌ बात को लेकर चिंतित होते हैं की क्या करें और क्या नहीं। वह नियमित परीक्षण पर जाते हैं और बच्चों के नाम की सूची तैयार करते हैं। एक बात जिसके बारे में हम में से कोई बात नहीं करता है और वह है की शिशु गर्भ में कैसा महसूस करते हैं। कोई भी नहीं जानता है की गर्भ में उन्हें क्या पसंद होता है क्योंकि कोई भी इसे याद नहीं कर सकता है और ना ही इसका कोई सबूत है। लेकिन यह मां को यह सोचने से नहीं रोक सकता है की उनका शिशु कैसा महसूस करता है। क्या बच्चों को यह वास्तव में पसंद आता है? या वह इसे नापसंद करते हैं? इस बात को उचित प्रकार से जानने का कोई तरीका नहीं है की आपके शिशु को गर्भ में आपका नारियल कुकी खाना पसंद आएगा या नहीं। आपका बच्चा कैसा है यह जानने का बस एक ही तरीका है और वह है अल्ट्रासाउंड स्कैन।

अल्ट्रासाउंड स्कैन में अपने शिशु के चेहरे को देखकर यह पता लगाना संभव होता है की आपका शिशु उदास है या खुश। वह रोते नहीं है लेकिन वह चेहरे बनातें है अगर वह उदास हो तो। यह है कुछ बातें जो शिशु गर्भ में बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं।

जब मां जोर से हंसती है – गर्भवती महिलाओं पर अध्ययन के दौरान और अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग मशीन के द्वारा मां के हंसने पर भ्रूण की प्रतिक्रिया को देखा गया। उन्होंने मां को हंसने के लिए कहा ताकि वह भ्रूण की प्रतिक्रिया को रिकॉर्ड कर सकें। मां के जोर से हंसने से पेट ऊपर नीचे हिलता है और इससे शिशु भी उछलता है आधे शिशु भी हंसना शुरू कर देते हैं जब उनकी मां हंसती है। और आधे शिशु हालांकि उन्हें यह सुखदायक नहीं लगता है। वह उदास लगते हैं और मां के गर्भ में उछलने के कारण रोते भी है।

चौंकना – शिशु चौंक जाते हैं जब वह तेज़ आवाज़ सुनते हैं या उनकी मां अचानक कूदती या अपनी पोजीशन बदलती है। जैसे की हमें भी चौंकना पसंद नहीं होता है उसी प्रकार शिशु भी यह पसंद नहीं करते हैं। उनका बाहरी दुनिया से आपके अलावा कोई संबंध नहीं होता है और वह 28 हफ्तों की उम्र से गर्भ में देखना शुरू करते हैं।

जब मां बिस्तर पर इधर से उधर लेटती है – यह भी मां के हंसने के समान ही है की जब मां अपनी स्थिति बदलती है,तो शिशु को भी स्थिति बदलनी पड़ती है। कुछ स्थितियों में शिशु को गतिविधि करने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिलता है और इस दौरान शिशु किक करते हैं क्योंकि उन्हें असहजता महसूस होती है।

शोर-शराबा – किसी को भी शोर-शराबा पसंद नहीं होता है। जब आसपास का वातावरण शोरगुल से भरा होता है तो इससे आपके शिशु को केवल समस्या होती है और वह चौंक जाते हैं। यह तब भी हो सकता है जब आप अपने मनपसंद टेलीविजन धारावाहिक तेज आवाज़ में देखें या रेडियो तेज़ आवाज़ में सुनें।

पेट को छूना – शिशु की प्रतिक्रिया देखने के लिए अपने पेट को छूना मां के लिए बहुत ही सामान्य बात है। यह बहुत अच्छा तरीका है अपने शिशु को अपने साथ खेलने के लिए उत्साहित करने का। जब आपका शिशु किक करें तो आप सौम्यता से उस हिस्से को छू सकते हैं और देखें की उनकी प्रतिक्रिया क्या है। अगर वह और किक करना और घूमना शुरू कर दें तो इसका मतलब है की वह खेलना चाहते हैं और अगर वह उसकी प्रतिक्रिया ना दें तो इसका मतलब है की वह अकेले रहना चाहते हैं।

जब मां तनाव में हों – शिशु यह महसूस कर सकता है जब मां तनाव में होती है। शरीर कोर्टिसोल का उत्पादन करता है जिससे थकावट और कमजोरी महसूस होती है। ऐसा ही तब भी होता है जब मां उदास हो। शिशु का मूड मां के मूड से प्रभावित हो सकता है। इसलिए ख़ुश रहने की कोशिश करें और आपका शिशु भी खुश रहेगा।

 

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