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अपने छः से एक साल तक के शिशु को ये बातें सिखाना है ज़रूरी


बच्चे हर किसी के ख़ुशी का कारण होते हैं, एक बच्चा पूरे परिवार को जोड़ता है और ख़ुशी का कारण बनता है। यही ख़ुशी तब और ज़्यादा दुगनी हो जाती है जब वही शिशु हँसता है, बोलने की कोशिश करता है और चलने की कोशिश करता है। लेकिन इसका एक निर्धारित वक़्त होता है जब आपका शिशु कुछ एक्टिविटी करता है पर यही वक़्त होता है जब शिशु सीखते हैं और एक्टिव होते हैं। बच्चे मिट्टी की तरह होते हैं आप उन्हें जैसा आकार देंगे वो वैसे ही बनेंगे इसलिए आप अपने छः महीने से एक साल के शिशु को कुछ शुरूआती बातें सीखा सकती हैं जिनकी मदद से वो जल्दी बातों को समझना सीख सकेंगे और एक्टिव होंगे। आज इस ब्लॉग के ज़रिये हम आपको बता रहे हैं की ऐसी कौनसी चीज़ें हैं जो आप अपने छः साल से लेकर एक साल के शिशु को सीखा सकेंगे।

 

1. नाम समझना सिखाएं

 

 

शिशु के कान बहुत तेज होते हैं थोड़ी सी आहट से ही उनकी नींद खुल जाती है इसलिए जब शिशु थोड़ा बड़ा हो तो आप उसे उसके नाम से पुकारना शुरू करें । घर के अलग-अलग जगहों से उन्हें पुकारे ताकि उनका ध्यान आवाज़ की ओर जाए और वो अपने नाम को समझना शुरू करें क्यूंकि याद रखें आगे चलकर नाम ही एक शिशु की पहचान होता है इसलिए शिशु के अपने नाम को समझना ज़रूरी है।

2. बोलना सिखाएं

शिशु रेंगना और चलना तो कम वक़्त में ही सिखने लगते हैं लेकिन अगर बात आये बोलने की तो इसमें शिशु को थोड़ा वक़्त लगता है लेकिन बड़े-बूढ़ों का मानना है और यह बात सही भी है कि जितना आप छोटे बच्चों के साथ वक़्त बिताएंगे और उनसे बात करेंगे वो उतनी ही जल्दी बोलना सीखेंगे। शुरुआत में शिशु माँ, पापा जैसे शब्दों को सीखते हैं खासकर करके जिन शब्दों में आकार हो वैसे शब्दों को सीखते हैं क्यूंकि यह शब्द शिशु के लिए आसान होता है और जब आप उनके साथ वक़्त बिताते हैं तो वो ना सिर्फ हँसते-खिलखिलाते हैं बल्कि आपकी बातें सुनकर बोलने की भी कोशिश करने लगते हैं।

3. फुर्तीला बनाएं

अपने शिशु को एक्टिव बनाये उन्हें ऐसे खिलौने दें जिससे वो तेज बने। उन्हें गेंद से खिलाएं और उनके साथ आप भी खेलें ताकि वो फुर्तीले बने इसके आलावा उनकी आँखें भी तेज होगी और यह एक तरह का एक्सरसाइज होगा आपके शिशु के लिए जिससे आपके शिशु के हाथ-पैर स्ट्रॉन्ग होंगे।

4. खाना सिखाएं

छः महीने के बाद शिशु माँ के दूध के अलावा हल्की-फुल्की अन्य चीज़ें खाना सीखता है इसलिए ऐसे में शिशु को हरी सब्ज़ियों का सूप, फलों के रस जैसी चीज़ों को खाना सिखाएं क्यूंकि यही वक़्त होता है जब शिशु स्वाद पहचानना शुरू करते हैं। इसके अलावा बाहरी चीज़ें नहीं दें अगर आप शिशु को बाहरी चीज़ें या कुछ चटपटा देते हैं तो ना सिर्फ उनके सेहत पर असर पड़ेगा बल्कि उन्हें बाहरी खाने की चीज़ों की आदत लग जायेगी। इसलिए घर का बना स्वच्छ और सादा खाना ही दें।

5. चीज़ों को पकड़ना और पहचानना सिखाएं

अपने शिशु को आत्मनिर्भर बनाएं उन्हें वॉकर पर चलाएं इसके अलावा आप उनके सामने कुछ खाने की चीज़ें रख दें और उन्हें खुद से खाने के लिए प्रोत्साहित करें। हो सकता है शुरू-शुरू वो खाने को गिराकर खाएंगे इसलिए आप उनके सामने ही रहे ताकि आप उन्हें नीचे गिरे हुए चीज़ों को खाने से रोक सके। इससे एक और फायदा होगा की आप अपने शिशु को सही गलत में फर्क करना भी सीखा सकेंगे और उन्हें अच्छी आदतें सीखा सकेंगे ।

 

शिशु बहुत ही कोमल और नाज़ुक होते हैं और वो कोई भी चीज़ जल्दी सीखते हैं बस ज़रूरत होती है तो उनपर ध्यान देने की इसलिए अगर आप चाहते हैं की आपका शिशु शुरुआत से ही अच्छी बातें और आदतें सीखे तो आप उनके साथ वक़्त बिताएं और उन्हें समझें।

हैप्पी पैरेंटिंग !

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