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अगर आप भी अपने शिशु के कान छिदवाने का सोच रहे हैं तो ध्यान रखें इन बातों का

बच्चे के कान छिदवाने का चलन बहुत पहले से चला आ रहा है, कुछ माता-पिता बच्चों के थोड़े बड़े होने पर उनके कान छिदवातें हैं और वहीं कुछ माता-पिता अपने बच्चे के कुछ महीने होने पर ही उनके कान छिदवा देते हैं। इस मामले में हर किसी की अपनी-अपनी अलग धारणा है लेकिन अगर देखा जाए तो कान छिदवाने का सही वक़्त दो से तीन साल के बीच का होता है। लेकिन हर मामले में शिशु के कान छिदवाते वक़्त कुछ अहम् बातों का ध्यान रखना होता है और आज इस ब्लॉग के ज़रिये ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण बातें आपको बता रहे हैं।

एक्सपर्ट से ही छिदवाएं कान

हमेशा याद रखें की अपने शिशु का कान उनसे छिदवाएं जो काफी सालों से इस प्रोफेशन में है। अपने आस-पास के लोगों से भी बात करें उनसे जानकारी लेकर अच्छे सुनार या किसी प्रोफेशनल के पास ही अपने शिशु को ले जाएँ ताकि वो आपके शिशु का कान सही तरीके से छेदे और आपके शिशु को तकलीफ़ कम हो।

सोने से ही छिदवाएं कान

शिशु के कान छिदवाने के लिए सुनार को या जो आपके शिशु का कान छेद रहे हैं उन्हें सोने का ही प्रयोग करने को कहें क्यूंकि सोने से इन्फेक्शन होने का ख़तरा कम होता है अगर दूसरे किसी धातु का इस्तेमाल किया जाए तो इन्फेक्शन होने का ख़तरा ज़्यादा रहता है। इसके अलावा आप शिशु को सोने की ही छोटी और पतली तार वाली बालियां पहनाये जिससे की उसे घुमाना आसान हो और घाव जल्दी ठीक हो। बहुत से जगहों पर जिस सोने के तार से कान छेदा जाता है बच्चे को वही पहना दी जाती है जिससे बच्चे को तकलीफ कम होती है। इसके साथ ही साथ बूंदे ना पहनाये बल्कि बालियां पहनाये जिससे आपके शिशु का घाव जल्दी ठीक हो बूंदे पहनाने से घाव होने का ज़्यादा डर रहता है और कान पकने का भी डर होता है।

इन्फेक्शन का रखें ध्यान

कान छिदवाने के बाद घाव होने का या पकने का ज़्यादा डर रहता है इसलिए आप अपने शिशु के कान में सुबह की ओस ज़रूर लगाएं इसके अलावा आप हल्दी और नारियल तेल का पेस्ट बनाकर भी लगा सकती हैं। लेकिन अगर आपको लगे की आपके शिशु को ज़्यादा परेशानी हो रही है और घाव ज़्यादा बढ़ रहा है तो बिना देर किये हुए डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करें।

शिशु पर रखें ध्यान

शिशु बहुत चंचल होते हैं इसलिए उनपर ज़रूर ध्यान रखें क्यूंकि वो अपने कान की बाली खिंच भी सकते हैं या अपने आप को चोट भी पहुंचा सकते हैं जिससे उन्हें इन्फेक्शन हो सकता है और उनका घाव बढ़ सकता है । इसलिए अपने शिशु पर ध्यान रखें और उनकी साफ़ सफाई का भी ध्यान रखें क्यूंकि अगर वो गंदे हाथों से अपने कान छुएंगे तो इन्फेक्शन का खतरा और बढ़ सकता है।

कपड़ों का भी रखें ख्याल

अपने शिशु के कान छिदवाने के बाद उन्हें ढीले और आरामदायक कपड़े पहनाये ताकि कपड़े आसानी से बदले जा सके। इसके अलावा कपड़े पहनाते वक़्त उनके कान में चोट ना लगे और उन्हें कोई तकलीफ़ ना हो।

इन सबके अलावा कुछ और बातें हैं जिसका ध्यान रखना चाहिए जैसे -

- कान छिदवाने से पहले ध्यान रखें की आपका शिशु स्वस्थ हो नहीं तो उसकी परेशानी और ज़्यादा बढ़ सकती है।

- कान छिदवाते वक़्त अपने शिशु का कोई पसंदीदा खिलौना या चॉकलेट दें ताकि उनका ध्यान दूसरी तरफ हो और वो ज़्यादा हिले नहीं और उन्हें तकलीफ़ भी कम हो।

- कान छिदवाने के बाद शिशु को छोटी इयररिंग्स पहनाये और कुछ महीनों तक जब तक घाव भर ना जाए इयररिंग्स बदले ना।

शिशु बहुत ही कोमल और नाज़ुक होते हैं और हर माता-पिता अपने शिशु का ख़ास ख्याल रखना चाहते हैं और कोई भी माता-पिता अपने शिशु को तकलीफ़ में नहीं देख सकते। इसलिए इन सब बातों का ध्यान रखकर आप अपने शिशु के तकलीफ़ को कम कर सकते हैं। 

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