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आपके पीरियड्स के बारे में कुछ ऐसा सोचते हैं पुरुष


पीरियड्स हर महिला के शरीर में होने वाली एक प्राकृतिक क्रिया है जिसका एक निर्धारित वक़्त है हालाँकि पीरियड्स के बारे में बात करना बहुत बार एक संवेदनशील मुद्दा हो जाता है और खुद महिलाएं भी इसके बारे में बात करने से संकोच करती हैं। लेकिन जब से अक्षय कुमार की 'पैडमैन' फिल्म आयी है तब से लोग थोड़ा बहुत ही सही लेकिन बात करना शुरू कर चुके हैं। पर कभी आपने सोचा है की पुरुष पीरियड्स के बारे में क्या सोचते हैं, आज हम इस ब्लॉग के ज़रिये आपको कुछ बातें बता रहे हैं जो पुरुषों ने पीरियड के बारे में कभी न कभी सोचा होगा।

1. पीएमएस से लगता है डर

पीरियड्स से ज़्यादा पीरियड्स शुरू होने के पहले का वक़्त महिलाओं के लिए मुश्किलों से भरा होता है क्यूंकि इस वक़्त उन्हें चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स होने लगते हैं और यही चीज़ें पुरुषों को भी कहीं ना कहीं डराती हैं। क्यूंकि इस दौरान महिलाएं लड़ने-झगड़ने तक लगती हैं और इस बात को कभी-कभी पुरुष ठीक से समझ नहीं पाते और इसलिए जब महिलाओं के पीरियड्स का टाइम नहीं भी होता है और अगर वो किसी बात पर लड़ पड़ें तो पुरुष पूछ बैठते हैं की क्या तुम्हारे पीरियड्स आने वाले हैं।

 

 

2. कितना होता है ब्लड फ्लो ?

पुरुषों के मन में कभी ना कभी यह ख्याल ज़रूर आया होगा की कितना ब्लड आता है, क्या ब्लड लगातार आता है या रूक-रूक के आता है। अगर महिलाओं के शरीर से चार दिन तक लगातार ब्लड फ्लो होता है तो वो ज़िंदा कैसे रह लेती हैं क्या उन्हें कमज़ोरी नहीं होती ?

3. महिलाओं को पैड लगाने से कैसा महसूस होता है ?

कभी-कभी पुरुष यह भी सोचते हैं की महिलाओं को पैड लगाने से कैसा लगता है, कभी-कभी पुरुष पैड और डाइपर की भी तुलना करने लगते हैं क्यूंकि दोनों में एक चीज़ सामान्य है और वो है गीलेपन को सोखना। इसके अलावा पुरुषों को लगता है की महिलाएं पैड लगाकर अपनी रोज़मर्रा के कार्यों को कैसे कर लेती हैं क्या उन्हें असुविधा नहीं होती ?

 

4. टेंशन होती है दूर

कभी-कभी पति-पत्नी बिना सेफ्टी के सेक्स कर लेते हैं और जब उन्हें यह एहसास होता है तो उन्हें अनचाही प्रेगनेंसी का डर लगा रहता है। लेकिन जब पत्नी को पीरियड्स होते हैं तो पति की टेंशन दूर हो जाती है क्यूंकि पुरुष यह समझते हैं की अगर महिला को पीरियड्स हो रहे हैं तो वो प्रेग्नेंट नहीं है।

5. क्या उठने-बैठने या चलने में होती है तकलीफ़ ?

पुरुष कई बार ऐसा सोच लेते हैं की जब महिलाओं को ब्लीडिंग होती है तो उन्हें चलने-फिरने या उठने-बैठने में कितनी तकलीफ़ होती होंगी, इसके अलावा वो पूरी रात को सोती कैसे हैं ? लगातार खून आने के परिस्थिति में वो हर रोज़ इतनी आसानी से काम कैसे कर सकती हैं ? क्या पैड लगाकर उन्हें असहज महसूस नहीं होता ?

ये तो थे कुछ सवाल जो कभी ना कभी पुरुषों के मन में ज़रूर आता होगा, इसके अलावा भी पीरियड्स से जुड़े कई ऐसे सवाल हैं जो पुरुषों के मन में चलते हैं जैसे - महिलाओं को कैसे पता चलता होगा की पीरियड्स शुरू होने वाले हैं ?, महिलायें इस दौरान नहाती कैसे होगी ?, क्या इस वक़्त सेक्स किया जा सकता है ? लेकिन ज़रूरी नहीं हर पुरुष की सोच पीरियड्स के मामले में एक जैसी ही हो इसलिए अगर आप जानना चाहती हैं की आपके पार्टनर क्या सोचते हैं तो उनसे खुलकर बात करके आप उनके उलझन को सुलझा सकती हैं। साथ ही साथ जब आपके पार्टनर को इस बारे में सही जानकारी होगी तो वह भी आपके इस मुश्किल पलों में आपका साथ देंगे और आपको कम्फर्टेबल फील कराएंगे। 

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