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आपके बच्चे के कान छिदवाने से जुड़ी हर वो बात जिन्हें आपको जानना चाहिए !

सामान्य तौर पर बच्चों का कान बिना एनेस्थीसिया के छेदा जाता है, इसलिए आपके बच्चे को दर्द महसूस होता है। कुछ माता-पिता के लिए, जब बच्चे छोटे हों तभी सारे दर्द सह लेना बेहतर विकल्प होता है, जबकि कुछ माता-पिता के लिए जब तक बच्चा बड़ा ना हो जाए ,तब तक इंतजार करना सही होता हैं। कान छिदवाना एक व्यक्तिगत निर्णय है जिसे आपको अपने बच्चे की हित को ध्यान में रखते हुए लेना चाहिए।

दोनों ही तरीके में, छिदवाने से पहले डॉक्टर को सूचित कर देना बेहतर है। जब तक बच्ची थोड़ी बड़ी ना हो जाए तब तक आपको इंतजार करने की सलाह दी जाती है। इसका सामान्य कारण है कि बच्चे बेचैन होते हैं। आपका बच्चा हाथ के जरिए मुँह से कीटाणु कान तक ले जा सकता है, जिससे कि कान में संक्रमण हो सकता है। आपके लिए थोड़े बड़े बच्चे की तुलना में एक छोटे बच्चे की छिदवाई हुई कान का ध्यान रखना मुश्किल है।

आप कान छेदने में इस्तेमाल की गई वस्तुओं की स्वच्छता की गारंटी नहीं दे सकते, चूँकि बच्चे हर तरह के संक्रमण के प्रति संवेदनशील होते हैं |एक पैरेंट होने के नाते इस बिंदु पर ध्यान देना आवश्यक है। अगर आपने अपने बच्चे का कान बचपन में ही छिदवाने का निर्णय लिया है , तो उसे रैशेज या बुखार हो सकतें है। बच्चों का अपने शरीर में हो रहे किसी भी प्रकार के बदलाव के प्रति प्रतिक्रिया करना सामान्य है, अतः बच्चे के कान छिदवाने से पहले बच्चों के डाॅक्टर से मिल लें।

जब भी आप अपनी बच्ची का कान छिदवाने का निर्णय लें, 24 कैरेट सोने की ईयररिंग्स का इस्तेमाल करें ताकि संक्रमण के रिस्क कम किया जा सके। किसी भी दूसरी तरह की एसेसरीज आपके बच्चे की त्वचा पर बुरा असर डाल सकती हैं।  जन्म के तुरंत बाद आपके बच्चे का शरीर और त्वचा काफी संवेदनशील होती है ,अतः कान छिदवाने में जल्दबाजी करने से बेहतर है, बचाव को ध्यान में रखना।

बच्चे का कान छिदवाने के बाद 6 हफ्ते तक ईयररिंग ना निकालें। इस बात का खास ख्याल रखें कि बच्चे को किसी प्रकार का संक्रमण, जलन या एलर्जी ना हो। ध्यानपूर्वक, दिन में कम से कम एक बार ईयररिंग को गोल घुमा दें, ऐसा करने से शीघ्र भर रही त्वचा में ईयररिंग्स के फँसने की संभावना कम हो जाती है। जलन, खून बहना, डिस्चार्ज वगैरह संक्रमण के आम लक्षण हैं, अतः डॉक्टर से सलाह लेकर अपने बच्चे की देखभाल करना उचित है।

संक्रमण के लिए एक आसान घरेलू उपाय है, संक्रमित जगह पर एल्कोहल या आफ्टरशेव क्रीम लगाना। अपने बच्चे का कान छिदवाना उन सब चीजों में से एक है जिनके लिए नए माता-पिता काफी अनभिज्ञ होते हैं। इसके लिए आपको डॉक्टर और परिवार के बड़े सदस्यों से सलाह लेनी पड़ सकती है।

अंततः, यह पैरेंट की आंतरिक इच्छा है जो प्रक्रिया को सफल बनाती है।

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