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आपका हेल्दी बेबी भी हो सकता है इस बीमारी का शिकार


  क्या आपके बालरोग विशेषज्ञ ने आपको बताया है कि आपका शिशु कुपोषण से ग्रस्त हैं जबकि उसका वजन अधिक है? यह आपको भ्रमित कर सकता है लेकिन दुर्भाग्यवश यह सच है। कुपोषण सिर्फ कम वज़न के ही बारे में नहीं बल्कि अधिक वजन में भी हो सकता है। और दिलचस्प बात यह है की मोटापा भूखे रहने से भी हो सकता है। अब सचेत हो जाइए। हम आपको इस स्थिति के बारे में सबकुछ बताने जा रहे हैं।

 कुपोषण क्या है?

कुपोषण का अर्थ है आवश्यक न्यूट्रीशन, ऊर्जा और मिनरल तत्वों की कमी। यह बीमारी हमारे भोजन में इन पौष्टिक तत्वों की कमी के कारण होती है। कुपोषण पोषक तत्वों की कमी व अधिकता दोनों के कारण हो सकता है क्योंकि पोषण तत्वों की अधिकता से भी शरीर को नुक्सान होता है। कुपोषण शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करता है और यह शिशु को भी प्रभावित कर सकता है। यह प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर कर बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

क्या मोटापा कुपोषण का परिणाम है?

 

कुपोषण का परिणाम मोटापा भी हो सकता है। मोटापा अपौष्टिक भोजन का अधिक सेवन करने से मोटापा होता है। जब बच्चे बहुत अधिक जंक फूड या अपौष्टिक भोजन ऐसे व्यंजन जो सैचुरेटेड,ट्रांशफेट, शुगर,डेंस एनर्जी फूड आदि से युक्त होते हैं इनका सेवन करते हैं तो उनमें मोटापा बढ़ता है। मोटापा कई आहार संबंधी बीमारियां खासतौर पर हृदय रोग का कारण होता है। इससे टाइप-2 डायबिटीज और जोड़ों में दर्द हो सकता है।

अपने शिशु में मोटापे की समस्या का निवारण कैसे करें?

 

सही प्रकार का भोजन करने से शिशु को मानसिक व शारीरिक दोनों प्रकार से वृद्धि करने में मदद मिलती हैं। लेकिन उचित आहार का मतलब क्या है?

अगर आपका बच्चा हर समय एक ही तरह का भोजन कर रहा है तो उन्हें कुपोषित होने का खतरा है क्योंकि एक प्रकार का आहार केवल कुछ ही पोषण प्रदान करता है ना की सभी पोषण। विकासशील देशों में जैसे की भारत में इंस्टेंट फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इन भोज्य पदार्थों में शुगर,ट्रांसफेट उच्च मात्रा में होता है और यह सोडियम वह मैग्नीशियम से युक्त होते हैं। यह शरीर के संतुलन को मोटापे की ओर झुकाते हैं। इन सभी समस्याओं से आप पौष्टिक भोजन को ग्रहण कर के छुटकारा पा सकते हैं।

बचाव आपको चिंताओं से दूर रखेगा।

कुपोषण को कम उम्र से ही जांचा जा सकता है।

कुपोषण को पहचानने का सबसे अच्छा तरीका है अपने बच्चे के वज़न पर निगरानी रखना।

इसका दूसरा तरीका है अपने बच्चे को सही भोजन खिलाना। अपने डायटिशियन से बात करें और पता लगाएं की आपका बच्चा पौष्टिक तत्व लेते हुए सही तरह से अपना वजन कम कैसे करें। उन्हें बच्चे के भोजन संबंधी पैर्टन की जानकारी दें और तकलीफ़ भी बताएं।

अगर बच्चे को किसी विशेष पौष्टिक तत्व की कमी है तो उन्हें उस तत्व से युक्त भोजन खिलाएं। हालांकि अन्य भोजन को ना छोड़े। बच्चे में पौष्टिक तत्व की कमी को पूरा करें लेकिन यह भी सुनिश्चित करें की वह संतुलित आहार लें।

मोटापे से निपटना जितना आप सोचती है उससे कहीं अधिक आसान है। आपको सिर्फ सही प्रयास करने की जरूरत है।

बच्चों में मोटापे को कम करने के पांच टिप्स।

नाश्ता जरूरी है

नाश्ता सुबह का पहला आहार होना चाहिए। अच्छे नाश्ते का मतलब है कि आप अपने बच्चे के शरीर को पूरे दिन के लिए पर्याप्त कैलोरी दे रहे हैं। अगर आप बच्चे को नाश्ता नहीं देंगे तो वह कुछ भी खाना शुरू कर देंगे। क्योंकि अगर आप नाश्ता नहीं करते हैं तो आपका ब्लड शुगर लेवल गिरता है और आपको भूख लगती है,कम ऊर्जा होती है और अंत में आप अस्वस्थ भोजन का सेवन करते हैं।

एक्सरसाइज कराएं

अगर आप अपने शिशु की मांसपेशियों पर काम नहीं करते हैं तो वह जकड़ जाती हैं। जब आपको पसीना होता है तो आपका शरीर पसीने के माध्यम से वसा को भी बाहर निकालता है। नियमित रूप से बच्चे को व्यायाम कराना भी अच्छा तरीका है मोटापे को दूर रखने का। कुछ एक्सरसाइज करने से आपके बच्चे को वज़न कम करने में मदद मिलेगी।

पर्याप्त मात्रा में भोजन खिलाएं 

बच्चे के भोजन लेने की मात्रा एक व्यस्क की मात्रा से भिन्न होता है। यह बात विशेषकर तब ध्यान रखनी चाहिए जब बच्चा जंक फूड या फास्ट फूड का सेवन करें। यह देखें की बच्चा कितना भोजन खा सकता है और उन्हें जरूरत से ज्यादा ना खिलाएं। बच्चों में पसंदीदा चीज़ को अधिक खाने की आदत होती है। तीन से आठ साल के बच्चे को 80-90 प्रति किलोग्राम कैलोरी रोजाना लेने की आवश्यकता होती है। जबकी आठ से बारह साल के बच्चे को 60-80 प्रति किलोग्राम कैलोरी लेने की जरूरत होती है। कैलोरी के जोड़ के अनुसार प्रत्येक दिन आपके बच्चे को 76% वसा, 13% प्रोटिन और 11% कार्बोहाइड्रेट की जरूरत होती है।

गैजेट्स के प्रयोग का समय कम करें 

जी हां आपने सही पढ़ा, अगर आप अपने बच्चे का वजन कम करना चाहते हैं तो उनके टेलीविजन, लेपटॉप और मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने का समय कम कर दें। इसका आसान सा मतलब यह है की वह इस समय को शारीरिक गतिविधियों में लगाएँ ।

बी एम आई का ध्यान रखें 

अगर आप बी एम आई द्वारा जांच करेंगे तो आपको पता होगा की आपका शिशु रेडजोन में है या नहीं। बी एम आई से आपको जानने में मदद मिलती है की आपके बच्चे का वज़न कितना होना चाहिए। साथ ही आपको अच्छे रेशे, प्रोटिन और वसा व कैलोरी की कितनी मात्रा लेनी चाहिए यह भी आप जांच सकते हैं।

यह बात याद रखें की आपका बच्चा सिर्फ मोटा नहीं है बल्कि कुपोषित भी है। उनका जंक फूड कम करने के साथ ही आपको यह बात ध्यान में रखनी चाहिए की वह पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक भोजन का सेवन करें। बच्चों में पोषण संबंधी असमानताओं को ठीक करने का सबसे बेहतर तरीका है की आप उन्हें संतुलित आहार दें।

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