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आप भी तो कहीं अपने बच्चे से इस तरह से तो पेश नहीं आते

प्रत्येक माता-पिता का यही सपना होता है कि उसका बच्चा बेहतर बने, और हर अभिभावकअपने बच्चों के अच्छे भविष्य के बारे में सोचते हैं। अपने बच्चों को ऐसे व्यक्तियों के रूप में देखना चाहते हैं जो सफल हों और खुद को अच्छी तरह से संचालित करना जानते हों। ऐसे बहुत से माता-पिता होते हैं जो यह सोचते हैं कि उनके सारे सपने उनका बच्चा पूरा करेगा। अगर आप भी अभिभावक हैं तो आप भी अपने बच्चे से यही उम्मीद लगाते होगें कि आपका बच्चा सारी उम्मीदों पर खरा उतरेगा।

लेकिन बहुत से अभिभावक इस तथ्य को भूल जाते हैं कि सभी बच्चे अलग-अलग मानसिकता और अलग व्यक्तित्व वाले होते हैं। आज के समय घर से लेकर स्कूल तक हर जगह बच्चों में प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। जिसकी वजह से पैरेंटस यही सोचते हैं कि उनका बच्चा सबसे आगे हो। और इसी होड़ में अभिभावक अपने बच्चे से जरुरत से ज्यादा उम्मीदें लगा लेते हैं। कहीं आप तो ऐसे पैरेंटस नहीं। कहीं एक अभिभावक के रूप में आप भी इस तरह से बच्चे के साथ व्यवहार तो नहीं कर रहे हैं। तो आपके लिये यह जानना जरुरी है कि कहीं आप भी तो रवैया अपना रहे हैं।

कहीं आप भी अपने बच्चे के साथ ऐसा व्यवहार तो नहीं कर रहे हैं-

-प्रत्येक बच्चे के जीवन में नियम बनाना जरुरी होता है। बच्चों को अच्छे और बुरे के बारे में पता नहीं होता है, इसलिए माता-पिता उन्हें इसके बारे में जागरूक करते हैं। लेकिन कुछ अपने नियमों में बहुत सख्ती बरतते हैं, और अपने बच्चे के जीवन को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। जैसे कि ऐसे कपड़े मत पहनों, ऐसे मत चलो । ऐसा मत करो, यहां मत जाओ, उससे मत बात करो ऐसे नियम बनाने से बच्चा कभी आपकी बात नहीं मानेगा। बेटा हो या बेटी नियम बनाने से पहले उससे दोस्ताना व्यवहार करना सीखे, क्योंकि कोई भी काम सख्ती से नहीं हो सकता है।

-पढ़ाई हो या खेल, उसे हमेशा प्रथम श्रेणी में आने के लिये दबाब ना डाले। बच्चे को उस खेल को सीखने दें समझने दे, उस पर किसी तरह का ऐसा बोझ नहीं डाले। तुम ऐसा नहीं करोगें तो तुम्हें सजा मिलेगी इस तरह की बातें बच्चो से बिल्कुल मत कहे। ऐसी बातों से बच्चे या तो डर जाते हैं या फिर कोई गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसा कहने कि बजाए उसे प्रोत्साहित करें, उसके टैलेंट को समझे, बच्चे से प्यार से बात करें। अगर आपका बच्चा किसी तरह की परीक्षा में फेल हो जाता है, या किसी प्रतियोगिता में हार जाता है तो उसे डाटें नहीं। बल्कि प्यार से समझायें और बच्चा कहां गलती कर रहा है यह समझने की कोशिश करे।

-अपने बच्चे से यह कभी नहीं कहें कि तुम यह नहीं करोगें तो इसका गंभीर परिणाम होगा। बच्चे को अनुशासित करने का यह कोई सही तरीका नहीं है। ऐसा व्यवहार एक अभिभावक के रूप में आपकी अक्षमता को दर्शाता है। ध्यान रखें बच्चे हमेशा प्यार की भाषा समझते हैं ना कि डांट कि। बच्चो को ज्यादा डांटना उनको गलत राह पर ले जाता है।

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-सबसे पहले बच्चे में आत्मविश्वास की भावना लायें, एक बच्चे में आत्मविश्वास तभी आता है जब उसके माता-पिता उस पर भरोसा करते हैं।

-बच्चे को प्रत्येक क्षेत्र में प्रोत्साहित करना चाहिए, अगर वह खेल में रुचि नहीं रखता है। बच्चे के ऊपर दबाब नहीं डाले, बल्कि जिस चीज में उसकी रुचि है उसी के लिये प्रेरित करें।

-यदि आप देखते हैं कि किसी भी तरह की सलाह या सुझाव के लिए अचानक आपके बच्चे ने आपके पास आना बंद कर दिया है, तो इसका मतलब है कि वह भी अपनी भावनाओं या विचारों को आपके साथ बांटने से डर रहा है।

-एक अभिभावक के रूप में, आपको अपने बच्चे को अच्छे और बुरे के बारे में मार्गदर्शन देना चाहिए। यह भी महत्वपूर्ण है कि छोटी-छोटी असफलताओं पर बच्चे को हताश नहीं होने दे। बल्कि उसे उन बातों के बारे में बात करें जिसकी वजह से वह असफल हुआ। उसे डांटे नहीं उसकी बात समझे, कि कहां गलत है, और क्यों गलत है।

बच्चों से दोस्ताना व्यवहार क्यों करना चाहिए-

आजकल बहुत से पैरेंटस वर्किंग हैं उनके पास अपने बच्चे की बातें सुनने के लिये समय नहीं है। ऐसे में बच्चे बहुत जल्द ही अपने माता-पिता से दूर होने लगते हैं, जिसका नतीजा होता है कि बच्चा हर बात में आपसे झूठ बोलने लगता है। आपकी बात नहीं सुनता है, जल्द ही गुस्सा होना लगता है। अपने व्यस्त समय से थोड़ा समय निकालयें, बच्चे की बातें सुनिये उससे दोस्ताना व्यवहार करिये।

बच्चों के ऊपर उनकी संगति का बहुत असर पड़ता है, ऐसे में आपका दोस्ताना व्यवहार आपके काम आयेगा। क्योंकि बच्चा आपसे बातें शेयर करने लगेगा, और उसकी लाइफ में क्या चल रहा है इसके बारे में भी आप काफी हद तक जान सकते हैं।

बच्चे को कैसे समझाये उसके लिये क्या सही है या गलत-

बच्चों को सही गलत के बारे में समझाना आपका ही कर्तव्य है, कुछ बच्चे जिद्दी होते हैं। और कुछ ऐसे कि जल्द ही किसी की बातों में आ जाते हैं, ऐसे बच्चे सही गलत को नहीं समझ सकते हैं। इन बच्चों को अगर डांटा जाये तो यह गलत कदम उठा सकते हैं, तो ऐसे बच्चों से प्यार से पेश आये, इन्हें धमकाये नहीं। यह जानने कि कोशिश करें कि बच्चा कहा गलत कर रहा है।

किसी के सामने बच्चे को डांटना उनके स्वाभाव को आक्रामक बना देता है।

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स्कूल में बच्चे की टीचर से बच्चे के बारे में खुलकर बात करें।

बच्चे के लिये नियम बनाना जरुरी है लेकिन कभी-कभी यही नियम बच्चे के लिये बोझ बनने लगते हैं। जैसे कि तुम्हें अभी यही काम करना है, तुमने नहीं करा तो तुम्हें सजा मिल सकती है। इस तरह की बातें बच्चे कों हताश करती हैं और वह कभी आपकी बात नहीं सुनेगा।

मोबाइल फोन, जो कि आजकल के बच्चों के लिये सबसे खतरनाक साबित हो रहा है। बच्चों को फोन से रखिये, फोन में प्राइवेसी सेटिंग जरुरी सेट करें।

निष्कर्ष-

आपकी छोटी-छोटी सी बातें आपके बच्चे के अच्छे भविष्य के लिये सही साबित हो सकती हैं।

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