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आखिर सोते सोते नींद में क्यों डर जाते हैं बच्चे..जानिए यहां

 

  बहुत से ऐसे लोग होते हैं जिन्हें रात को अकेले में काफी डर लगता है। खासतौर पर यह समस्या बच्चों के साथ देखी जाती है। इसे नाइट टेरर कहा जाता है जिससे काफी सारे बच्चे गुज़रते हैं। यह एक स्लीप डिसॉर्डर होता है जिसमें रात को बच्चों को डर के कारण नींद नहीं आती। ये नाइट टेरर बुरे सपनों से अगल होते हैं क्योंकि इसमें बच्चों को बुरे सपना देखकर डर लगने से भी ज्यादा डर लगता है। ये बच्चे इतना डर जाते हैं कि वो डर के कारण चीखने-चिल्लाने लगते हैं।

 

आपको बता दें कि ऐसी परेशानी आमतौर पर 3 से 12 साल के बच्चों में देखने को मिलती है। हालांकि कई बार वयस्क लोग भी इस डिसऑर्डर से पीड़ित पाए गए हैं लेकिन यह समस्या ज्यादातर बच्चों में ही देखने को मिलती है। यह ऐसा अनुभव है जिसके चलते बच्चे की नींद प्रभावित होती है और कुछ कुछ लोग तो इसकी वजह से तनाव, डिप्रेशन और इंसोम्निया का शिकार हो जाते हैं, क्योंकि उनकी नींद पूरी नहीं होती।

सबसे पहले तो आइए ये जान लीजिए कि कौन नाइट टेरर का शिकार होता है। बच्चों को यह समस्या तब खत्म होती है जब वो वयस्क हो जाते हैं।

अब नज़र डालिए कि क्यों बच्चों को नाइट टेरर की समस्या होती है।

• इसका पहला कारण हो सकता है तनाव।

• बुखार में बच्चों को ऐसी समस्या हो सकती है।

• नींद के अभाव में।

• दवाइयां जो कि दिमाग के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

लेकिन सवाल ये उठता कि नाइट टेरर के लक्षणों को बच्चों में कैसे पहचाना जाए। यहां हम आपको कुल लक्षण बताने जा रहे हैं..

• बच्चो रात को सोने से डरना

• सोते हुए अचनाक से वो डरकर उठकर बैठ जाए

• उसके दिल की धड़कनें बढ़ सकती हैं।

• सांसों की गति तेज होना। 

• आपको बच्चे को सोते सोते डर के कारण पसीना आना।

• इसके अलावा यह नाइट टेरर बच्चे को बुरे सपने की तरह याद नहीं रहता। बच्चा अगले दिन तक इस नाइट टेरर के बारे में भूल जाता है।

क्या होता है नाइट टेरर?

आपको बता दें कि बच्चे को नाइट टेरर की परेशानी अक्सर सोने के 90 मिनट के बाद शुरू होती है। इसमें बच्चा इतना डर जाता है कि चीखने लगता है और डर के कारण चिल्लाने लगता है। उसके आसपास माता-पिता होते हुए भी ऐसा महसूस करता है कि जैसे वो अकेला है। वो चाहकर भी अपनी स्थिति को बयां नहीं कर पाता। भले ही यह परेशानी कुछ ही देर में ठीक हो जाती है लेकिन इनते में उसकी पूरी नींद खराब हो जाती है।

क्या है समाधान

इसके लिए आप अपने बच्चे को हमेशा कमरे में सुरक्षित रखें। जिस कमरे में वो है उसमें ऐसी कोई चीज़ ना रखें जिससे उसकी नींद में बाधा पड़े।

इसके अलावा आप कोशिश करें कि अपने बच्चे को सुलाते समय उन्हें कोई सकारात्मक कहानियां सुनाएं जिससे उनके दिमाग में सोते समय कोई इधर उधर की बातें ना सताएं।

इसके अलावा सोते समय उसे गैजेट्स आदि से दूर रखें। और अगर लगे कि यह समस्या ज्यादा बढ़ रही है तो आप डॉक्टर से परामर्श लेने में देर ना करें। 

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