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भारत में बच्चों के लिए कौनसे प्राथमिक टीके की सिफारिश की गई है

दुनिया भर के जोड़ों के लिए बच्चे का जन्म खुशी का एक अद्वितीय क्षण है | हालांकि यह नकारा नहीं जा सकता है कि एक बच्चा अतिरिक्त जिम्मेदारियों के भार के साथ आता है | एक बच्चे के जन्म के कुछ ही मिनट से, माता पिता उनके स्वास्थ्य और कल्याण के लिए जवाबदेह बन जाते हैं। जैसे आपने अपनी गर्भावस्था में अपने मेडिकलअपॉइंटमेंट्स को याद रखा, किसी भी निर्धारित दवाओं का डॉक्टर के निर्देशानुसार सेवन किया , इसी तरह आपको बच्चे के भी सारे टीके भी याद रहने चाहिए।

वास्तव में टीकाकरण क्या है? इसे क्यों किया जाना चाहिए?

मानव रोगों से निपटने के लिए बच्चे का शरीर प्राकृतिक रूप से तैयार रहता है | उनका शरीर फैगोसिट्स और एन्ज़इम्स बाहर बनाते है जो हानिकारक पैथोजन्स से लड़ने में उनकी मदद करता है |

साधारण शब्दों में टीकाकरण को "अक्वायर्ड इम्युनिटी" कहा जाता है जो बच्चों के लिए अनिवार्य है | वातावरण में लाखों बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया और वायरस हैं। इन वर्षों में, विज्ञान ने इनमें से कई को पहचानने और अलग करने में बहुत मेहनत की है और इसके बदले में कई भयानक बीमारियों की पकड़ को सफलतापूर्वक कमजोर करने में मदद की है। टीकाकरण इंजेक्शन की प्रक्रिया है, इसमें बैक्टीरिया की कमजोर मात्रा मानव शरीर में इंजेक्शन द्वारा भेजी जाती है ताकि यह इन जीवाणुओं की पहचान करने और भविष्य में सक्रिय आक्रमण के मामले में तैयार हो सके। इसके अलावा, यदि आवश्यक हो तो इस टीके का बूस्टर डोस (चिकित्सक की सलाह पर) संक्रमण से लड़ने के लिए और बेहतर शक्ति प्रदान करने के लिए दिया जाता है।

टीकाकरण करने का समय:

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा दिए गए सलाह और मार्गदर्शन में टीकाकरण कार्यक्रम का दुनिया भर में पालन किया जाता है | प्रत्येक अस्पताल को बच्चे को दिए जाने वाले टीकाकरण पर एक टैब रखने के लिए एक फाइल या कार्ड के साथ नए माता-पिता को प्रदान करना आवश्यक है। माता-पिता बिना अनुसूची के शेड्यूल पर नजर रखते हैं | यह एक स्वागत योग्य कदम है ,यहाँ सभी अनिवार्य टीके कम लागत पर उपलब्ध हैं ताकि सभी का लाभ उठाया जा सके | प्रत्येक वैक्सीन के बारे में अपने चिकित्सक से समझें और जागरूकता बढ़ाने के लिए हर एक कदम पर नज़र रखें |

दिए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण टीके:
 1. ओरल पोलिओ वैक्सीन (ओपीवी):

5 वर्ष की उम्र तक सभी बच्चों को दिया जाना चाहिए। यह पोलियोमाइलाइटिस और पक्षाघात को दूर रखने में मदद करता है। यह मुफ्त में उपलब्ध है |

2. बैसिलस कैल्मेेट गुइरिन वैक्सीन (बीसीजी):

यह टीका टीबी के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रदान करता है। यह केवल 5 वर्ष तक दिया जा सकता है और 15 वर्ष की उम्र तक रोगक्षमता प्रदान करने में प्रभावी है।

3.  मेसल्स मम्प्स रुबेला वैक्सीन (एमएमआर):

यह तीन भयानक बीमारियों से राहत प्रदान करता है और सबसे पहले ये 9 महीने के बच्चे को दिया जाता है और दूसरा खुराक 1-1.3 साल के बीच होता है।

4.  डिप्थीरिया टेटनस पर्टुसिस वैक्सीन (डीपीटी):

ये टीका किसी भी समय 1.5 महीने से शुरू हो सकता है। यह एक बहु-खुराक  टीका है और जब तक बच्चा 10 साल का नहीं होता तब तक चक्र चलता रहता है।

5. रोटावायरस:

यह छह महीने से कम उम्र के बच्चों को दिया जाता है और यह एक बहु-खुराक  टीका भी रोटावायरस वैक्सीन मुंह द्वारा दिया जाता है. यह एक जीवित वायरस टीका होता है, जो बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है !

6. हेपेटाइटिस बी वैक्सीन:

लिवर को प्रभावित करने वाली बीमारी से प्रतिरक्षा प्रदान करने के लिए नवजात शिशुओं को ये टीका दिया जाता है। यदि मां अक्सर बीमार पड़ती हो तो यह बहु-खुराक में दिया जाता है |

टीके के प्रशासन के बारे में प्रो-वैक्सीन समूहों और टीकाकरण के खिलाफ लोगों के बीच यह एक लंबी बहस है। मेडिकल साइंस का मानना ​​है कि जनता के बीच "इम्युनिटी अवेयरनेस" बनाना महत्वपूर्ण है ,ताकि बैक्टीरिया और वायरस के कारण होने वाली बीमारियों की लोगों में जागरूकता हो और बड़े पैमाने बार इनसे निपटा जा सके | ट्रॉपिकल क्लाइमेट जैसे बीमारी वाले देशों में जिनमें हम भी शामिल हैं , यह महत्वपूर्ण है कि हर बच्चे को सही तरह से बीमारियों से प्रतिरक्षित किया जाए |

माता-पिता के रूप में यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम हमारे बच्चों की रक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि वे सभी परिस्थितियों में मजबूत और स्वस्थ रहे। डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए और सावधानीपूर्वक निर्धारित अनिवार्य टीकाकरण अनुसूची का पालन करना हमारे बच्चों के हित में है। माता-पिता याद रखें, टीकाकरण  ही सही रास्ता है!

हैप्पी पेरेंटिंग!

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