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6 समझौते नई माँओं के लिये ससुराल में


मातृत्व हर महिला की ज़िन्दगी से जुड़ा सबसे सुखद एहसास है। आप अपने शरीर में आने वाले परिवर्तन को महसूस कर रही हैं और अपनाती जा रही हैं। साथ ही साथ आपके पति के और करीब आ रही हैं। आप दोनों आने वाले बच्चे के उज्जवल भविष्य और सेहत की कामना कर रहे हैं। इन परिवर्तनों के बीच एक चीज़ है जो ठीक नही लग रही है। आपकी सासू-माँ। उन्हें आपके हर काम में नुक्स निकालना होता है तथा आपको खाने-पीने, उठने-बैठने, बोलने इत्यादि की तमीज़ सिखाई जाती है। सासू-माँ आपकी तुलना ननद से, पड़ोस की बहू से और खुद से भी करेंगी। आपको इन सब के लिये खुद को मानसिक रूप से तैयार करना होगा। यह सब विवाह पश्चात होने वाली आम बातें हैं। हमने आपके लिये 6 परिस्थितियाँ लिखी हैं जिनमें आपको यकीनन शांति बनाये रखने के लिये समझौता करना पड़ता है।

1. विचारों में भिन्नता

चूँकि आपकी सास उम्र और तजुर्बे में आपसे बड़ी हैं इसलिए वे आपको समय-समय पर अपना कीमती ज्ञान बाँटती रहेंगी। इसी बीच वे आपको किसी बात पर अपनी राय दे सकती हैं। आप दोनों के विचार किसी मामले में अलग हो सकते हैं। विचारों में मतभेद किसी सब्जी पकाने से लेकर संपत्ति-सम्बंधित बात हो सकती है। इस कारण आप दोनों के बीच बहस हो सकती है। लेकिन लड़ाई-झगड़े से बचने के लिये आप ने चुप्पी साधी होगी।

2. आपके मामलों में दख़ल-अंदाज़ी

देश आज़ाद हो गया, लेकिन कब आप सास की कैद से आज़ाद होंगी? यह ख्याल आपको अक्सर सताता होगा जब भी आपकी सास आपको बिना मांगे खुद की मुफ्त सलाह देती होंगी। वे आपके निजी या गैर-निजी मामलों में हस्तक्षेप करती होंगी। आप घर का खर्च कैसे संभालें, किस समय उठें, कब खाना खायें, पति से कैसे पेश आयें आदि मुद्दों पर सलाह पाती होंगी। परन्तु उस वक्त आपने बेशक ठंडे दिमाग से काम लिया होगा। आपने उनके सामने उनका मन रखने के लिये उनकी बात मानी होगी।

3. घर की परम्परा, कायदे-कानून और रीति-रिवाज़

आपकी सास को कई सालों से घर चलाने की आदत हो गयी है। वे इसे अपने ढंग से चला रही होंगी। इसलिए घर में कुछ विशेष नियम-कानून होंगे, काम करने के निर्धारित तरीके होंगे, साथ ही साथ घर की कुछ अपनी ही पुरानी परम्परायें होंगी। आप घर में अभी नई आईं हैं। शायद आपको आपके ससुराल के सभी तौर-तरीके पूर्ण रूप से न मालूम हों। कुछ पूजा-पाठ या रीति-रिवाज़ निभाने में आपसे भूल हो जाये तो आपकी सास आपको भला-बुरा कहने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। ऐसे में आपने माफ़ी मांगकर और बीती बात पर मिट्टी डालकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया होगा।

4. सबका एक मत होना

ऐसी परिस्थिति आती है जब आप किसी बात पर अपने पति की राय लेना चाहती हैं परन्तु इस बीच उन्हें आप और अपनी माँ के बीच में से किसी एक को चुनना पड़ता है। ऐसे में चाहे आप लाख सही क्यों न हों, परन्तु आपके पति अपनी माँ को ही सही ठहराएंगे क्योंकि यह उनकी माँ के मान-सम्मान की बात होती है। बाद में अकेले में आकर उन्होंने आपको परिस्थिति की गंभीरता समझते हुए माफ़ी भी मांगी होगी और पूरी बात समझाई होगी।

5. प्राइवेसी

संयुक्त परिवार में रहने के कारण आपको अक्सर अपने पति के साथ निजी पल नहीं मिल पाते होंगे। शायद आप घुटन महसूस करती होंगी। ऐसा आपके साथ ही नहीं, बल्कि और भी कई शादीशुदा महिलाओं के साथ होता है जो गर्भवती भी हैं। आपकी देखभाल के लिए आपको आपकी सास-ननद के साथ रखा गया होगा। परन्तु वे आपको अक्सर किसी न किसी काम में व्यस्त रखती होंगी। इस कारण आपके पति से आपकी बातचीत भी कम हो पाती होगी। ऐसा लगातार होने से आपके बीच वो रिश्ता नहीं बन पाता जिससे पति-पत्नी भावनात्मक और शरीरिक रूप से करीब आते हैं। शायद आप यह सोच कर चिड़चिड़ा जाती हों परन्तु धैर्य रखकर आपने खुद के ख्यालों पर काबू पाया होगा।

6. हरदम होती तुलना

हर इंसान खास होता है तथा सबमें कुछ न कुछ खूबी होती है। इंसान को बेहतर बनाने के लिये खुद को उसकी हर गलती से सबक लेकर, अगली बार सुधारना चाहिये। इसके साथ ही उसे प्रोत्साहित करना चाहिये व किसी से तुलना नहीं करनी चाहिये। अगर आपकी सास आपको बार-बार दूसरी महिलाओं से कम्पेयर करती हैं तो रहने दीजिये। यह वही बात है की जितना भी कर लो इंसान की चाहत कभी कम नही होगी। आप अपनी सास के लिये चाहे कितना अच्छा खाना क्यों न बनायें, उन्हें उसमें मीठे की कमी नज़र आएगी। आप घर साफ़ करेंगी तो उन्हें बगीचे की सफाई याद आ जाएगी और आँगन की धुल दिख जायेगी। ऐसे में उन्हें उनके हाल पर छोड़ दें। आप को दूसरों से कम्पयेर किया ही जायेगा।क्या करें लोगों की बुरी आदतें देर से जो जाती हैं। आप खुद की ग़ल्तियों को सही कीजिये और अपनी बेहतरी पर ध्यान दें।   

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