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6 साल का मासूम टिटेनस के कारण लड़ा जिंदगी और मौत की जंग—फिर भी माता-पिता ने नहीं करवाया टीकाकरण

- बच्चा 57 दिनों तक अस्पताल में रहा और उसके इलाज़ का खर्च लगभग $811,9290

- सेंट्रस ऑफ डिज़ीज़ कंट्रोल के अनुसार, टिकाकरण और आटिज्म के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है।

ओरिगन में 6 वर्षीय लड़का टिकाकरण न होने के कारण टिटनेस से लगभग मरने ही वाला था। वह 57 दिनों तक अस्पताल में रहा और उसके इलाज़ का खर्च लगभग $811,9290 आया।



सेंट्रस ऑफ डिज़ीज़ कंट्रोल द्वारा प्रकाशित केस स्टडी में एक लड़के के बारे में बताया गया है, जिसने फेमिली फार्म में खेलने के दौरान अपना सर काट लिया। उसके माता-पिता ने ज़ख्म साफ किया और उसपर टांकें लगाए लेकिन छह दिन बाद उसमें गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे—उसका जबड़ा भींचने लगा, गर्दन और कमर धनुषाकार (पीछे की ओर मुड़ना) हो गए, ओपिसोथोटोनस के सभी लक्षण, मांसपेशियों में ऐंठन यह सभी टिटनेस की ओर संकेत कर रहे थे।

बच्चे को विमान द्वारा बाल चिकित्सा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उसे टिटनेस हैं, यह राज्य में 30 सालों में टिटेनस का पहला मामला था। यह बीमारी बड़े पैमाने पर टिकाकरण की मदद से बहुत कम हो चुकी है।

जब वह अस्पताल पहुंचे तो बच्चा जगा हुआ था लेकिन वह अपना मुंह नहीं खोल पा रहा था, उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और लगातार ऐंठन हो रही थी। डॉक्टर ने बच्चे के ज़ख्म का इलाज करने के लिए एंटी टिटनेस इम्युनोग्लोबुलिन और डीटीएपी का पहला टिका लगाया, जो कि डिप्थीरिया, टिटनेस और पर्टसिस से संरक्षण प्रदान करता है।



बच्चे को एक अंधेरे कमरे में अकेला रखा गया ताकि ज़ख्म को संक्रमण से बचाया जा सके और कानों में ईयर प्लग लगाया गया क्योंकि आवाज़ होने से उसकी ऐंठन बढ़ सकती थी।

लेकिन कुछ दिन बाद बच्चे की हालात और ख़राब हो गई। बच्चे का ब्लड प्रेशर बढ़ गया, उसे सोअरिंग फीवर था और दिल की धड़कन तेज़ हो गई थी, इसलिए उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। बच्चा 47 दिनों तक आईसीयू में रहा और उसके बाद अस्पताल में दस दिन और बिताने के बाद बच्चे को पुनर्वास केंद्र भेजा गया।

“मैंने वास्तव में कभी नहीं सोचा था कि मैं संयुक्त राज्य में इस तरह की बीमारी देखूंगी” डॉ. जूडिथ ए. गुजमैन-कोट्रिल, ओरगिन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी की पीडियाट्रिक इंफेक्शियस डिज़ीज़ स्पेशलिस्ट, जिन्होंने बच्चे का इलाज़ किया और जो स्टडी की मुख्य लेखिका थी इन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया। “उसे तकलीफ़ में देखना, हम सभी के लिए यह बहुत मुश्किल था।”



अस्पताल में रहने के दौरान, लड़के के इलाज का खर्च लगभग $811,929 आया। गुजमैन-कोट्रिल ने वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि डीटीएपी के टीके द्वारा इससे बचाव किया जा सकता था।

“जटिल और लम्बे समय तक विशेष देखरेख में किए गए इलाज के कारण ख़र्चा बढ़ गया” उन्होंने कहा। “इसके बजाए एक डीटीएपी की खुराक का खर्चा $24-$30 और डीटीएपी टीके की पांच खुराक लेकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता था।”

कम लेकिन मुखर अल्पसंख्यक लोग, जो अपने बच्चों का टीकाकरण कराने से इंकार करते हैं, वह संयुक्त राज्य और संपूर्ण विश्व में बहस का ज्वलंत मुद्दा बने हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2019 में विश्व के स्वास्थ के लिए सबसे बड़े जोखिमों में से एक वैक्सिनेशन हैसिस्टेंसी (टीकाकरण कराने से इंकार करना) है और वैक्सिनेशन हैसिस्टेंसी के कारण ही वाशिंगटन और ओरिगन में बड़े स्तर पर खसरा की महामारी फैली थी। ओरिगन में, जहां यह लड़का रहता है वहां प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को कक्षाओं की शुरुआत होने से पहले टीकाकरण करवाना पड़ता है लेकिन उनके माता-पिता एक फार्म में दस्तख़त करके इससे बच सकते हैं।



एक बड़े अध्ययन में यह दोबारा पाया गया है कि टिकाकरण और आटिज्म के बीच कोई संबंध नहीं है।

अस्पताल में बच्चे के लम्बे इलाज और मौत के मुंह से वापस आने के बाद, डॉक्टरों ने बच्चे के माता-पिता से दरख्वास्त की कि वह डीटीएपी की बाकी चार खुराक़ और अन्य टीकाकरण करवाए। लेकिन डॉक्टरों द्वारा “टिटनेस के टिकाकरण के फ़ायदे और जानलेवा जोख़िम से भली-भांति परिचित कराने के बावजूद” अध्ययन के अनुसार, लड़के के माता-पिता ने अन्य खुराक़ और अन्य कोई भी टीकाकरण करवाने से इंकार कर दिया। 

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