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6 कसरत, आपके शिशु की मांसपेशियों को मज़बूत करने के लिए


आपका शिशु बहुत ही मुलायम गेंद की तरह है और अभी उनका शरीर बेहद नाज़ुक है। शायद आपको लगता हो की आपका बच्चा लेटा है और आराम कर रहा है लेकिन क्या आप जानती है की आपका बच्चा जब लेटा होता है तब भी वर्क आउट यानी कसरत कर रहा होता है। जबकि आपको लगता है,कि वह कुछ नहीं कर रहे हैं।

अगर आपने ध्यान दिया हो, तो आप देखेंगी की आपका शिशु लात मारता है या उत्साहित होकर हवा में पांव मारते है,जब आप उनके डाइपर बदलती है। वास्तव में वह अपनी मांसपेशियों को मजबूत कर रहे होते हैं और यह उनके लिए वास्तव में बहुत अच्छा होता है। क्योंकि वह केवल अपनी मोटर क्षमताओं को बढ़ाने का प्रयास कर रहे होते हैं।

यह है कुछ कसरत, जो आपके शिशु की विकासशील मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करेंगी।

1. सुपरमैन वाली कसरत

 इसमें आपको पीठ के बल लेटना होगा और अपने दोनों पैरों को अपने पेट के करीब रखकर ऊपर की ओर उठाना होगा। उसके बाद अपने शिशु को उसके पेट के सहारे अपने घुटनों पर संतुलित करने का प्रयास करें। इस दौरान अपने शिशु की बाहों को स्ट्रेच करने की कोशिश करें। इससे वह अपना सर उठाने का प्रयास करेगा और वास्तविक स्थिति(position) में वापस आ जाएगा। यह आपके लिए भी एक तरह की कसरत है।

2. हवा में साइकलिंग कराएं

 शिशु के पेट में बनी गैस को निकालने के लिए,यह बहुत बढ़िया कसरत है। यह गैस को बाहर निकालने का ना केवल प्राकृतिक तरीका है बल्कि यह उनकी मांसपेशियों जैसे घुटने, टांगों, कुल्हों और पेट के हिस्से की मांसपेशियों का विकास और उन्हें लचीला बनाने में मदद करता है। यह शिशुओं की मांसपेशियों को खोलने में मदद करता है। मां के लिए सुझाव : कसरत को और मजेदार व असरदार बनाने के लिए कू-कू, व्रूम-व्रूम जैसी आवाजें निकाले। अपने शिशु को उत्साहित होकर कसरत करते हुए देखना और उनसे इस तरह सहयोग पाना बहुत मजेदार होता है।

3. गर्दन की कसरत

 आपके शिशु की गर्दन बहुत नाज़ुक होती है और यह उनके सर के भारी वज़न को संभालने के लिए अपेक्षाकृत ढीली और नाज़ुक होती है। यहां तक की जब आपका शिशु छः हफ्ते का होता है,तब भी वह पेट के बल लेटें होने पर भी कुछ सेकेंड के लिए अपनी गर्दन ऊपर उठा सकते हैं। अपने शिशु को यह कसरत करने दें क्योंकि उनकी गर्दन सर का भार संभालने लायक मजबूत होनी चाहिए। यह उनकी मांसपेशियों को मजबूत करने और उनके सर व आंखों के समन्वय को सुधारने में मदद करता है। इससे आपका शिशु आसपास के वातावरण के साथ और सहज होने लगता है।

4. हाथ को अंदर व बाहर की ओर खोलना 

 अपने शिशु को पेट के बल लेटने दें और आप अपने शिशु के दोनों हाथ पकड़ लीजिए। आराम से उनके हाथों को पहले बाहर की ओर फिर अंदर की ओर स्ट्रेच कीजिए। इस कसरत को पांच मिनट के अंतराल के बाद दोहराते रहे। यह आपके शिशु की बाजुओं को आराम देने और उन्हें यह समझने में मदद करेगा की वे चीजों तक कैसे पहुंच सकते हैं।

5. ज़मीन पर रेंगना 

 एक बार जब आपका शिशु सात से दस महीने का हो जाता है,तब वह तैयार हो जाते हैं अपने हाथ पांव के बल पर हर जगह घूमने के लिए।आपका नन्हा-मुन्ना रेंगते हुए आगे पीछे वाले इधर उधर घूमने की कोशिश करता है। आप देखेंगी की इस दौरान वह अपने कुल्हों के बल गिर भी जाते हैं, लेकिन अपने संतुलन पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए इस तरह की कसरत जरूरी है।

6. सही स्थिति 

 बच्चे बैठने से पहले रोलिंग करना शुरू कर देते हैं। यह आमतौर पर छ से आठ महीने के शिशुओं में देखा जाता है। हालांकि शिशु इसी प्रकार की कसरत का इस्तेमाल करते हैं। अपनी मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए, बाकी यह पूरी तरह शिशु पर निर्भर करता है की वह इस बात को कैसे समझेगा की ऊपरी शरीर के अनुसार पैरों की स्थिति कैसी होनी चाहिए। मांसपेशियों को स्ट्रेच करने से वह,यह भी सीखेंगे की कैसे संतुलन बनाकर सही तरीके से खड़ा होना है। आपका बहुत रोने की आवाज सुननी होगी क्योंकि आपका बच्चा इस दौरान कई बार गिरेगा। तो यहां आपको उन्हें यह सीखना होगा की घुटनों को किस प्रकार मोड़ना है और उन्हें बताएं और करके दिखाए की यह कैसे किया जाता है।

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