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क्या हुआ जब 11 महीने के मासूम ने निगल ली ये चीज़ ?


शिशु हर घर के लिए खुशियां लेकर आते हैं, उनकी खिलखिलाहट और नटखट हरकतें हर किसी का दिल जीत लेती है। शिशु माता-पिता की खुशियों की चाभी होते हैं, लेकिन एक बच्चे के आने के बाद माता-पिता की ज़िम्मेदारियां भी बढ़ जाती है क्योंकि जब तक वो छोटे होते हैं और चलना और बोलना नहीं जानते है तब माता-पिता को उनकी परेशानियों को समझने में वक़्त लगता है और जब वो चलना शुरू करते हैं तब सबसे पहले वो इधर-उधर की चीज़ें मुँह में लेने लगते हैं जिस वजह से शिशु के पेट में कुछ उल्टी-सीधी चीज़ें चली जाती है जो कभी-कभी उनके जान पर बन आती है । ऐसा ही कुछ हुआ बैंगलोर के एक 11 महीने के मासूम के साथ। आज इस ब्लॉग में हम एक ऐसी घटना के बारे में बता रहे हैं जिसमें कैसे एक शिशु की जान खतरे में पड़ गई।

ख़बरों के मुताबिक, बैंगलोर में एक दुर्लभ केस सामने आया जिसमें एक 11 महीने के शिशु ने एक्वेरियम (aquarium) से एक ज़िंदा मछली निगल लिया। बाद में जब शिशु को सांस लेने में तकलीफ होने लगी और उसके मुँह से खून आने लगा तो उसके परिजन आनन-फानन में उसे तुरंत हॉस्पिटल ले गए। फिर कुछ टेस्ट कराने का बाद पता चला की वो मछली उसके गले में फंसी हुई थी जिस कारण शिशु को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू करके शिशु के पेट से उस मछली को बाहर निकाला। उस शिशु को एक दिन के लिए वेंटीलेटर पर रखा गया था और फिर तीन दिन तक डॉक्टरों के निगरानी में रखने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया था।

इस पुरे मामले के बाद उसके पिता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, उनके बेटे की नज़र हमेशा उस एक्वेरियम (aquarium) पर रहती थी और वो उस एक्वेरियम तक आसानी से पहुँच पाता था। एक दिन जब वो लिविंग रूम में था जहां वो एक्वेरियम रखा था उसने उसमें से एक मछली निकालकर अपने मुँह में डाल लिया उसी बीच जब उनके परिजन की शिशु पर नज़र गई तो वो तुरंत उसे हॉस्पिटल ले गए जहां सही वक़्त पर उनके शिशु का इलाज़ शुरू हो गया और उसकी जान बच गई। '

इस घटना के बाद यह तो साफ़ हो जाता है कि जब तक शिशु समझदार नहीं हो जाते उन्हें अकेला छोड़ना कितना खतरनाक हो सकता है। ये माता-पिता खुशकिस्मत थे जो उनकी नन्हीं सी जान बच गई, लेकिन ज़रूरी नहीं हर माता-पिता इतने खुशकिस्मत हो। इसलिए आज इस ब्लॉग के ज़रिए हम आपको कुछ टिप्स दे रहे हैं जिससे आप जानें कि जब आपका शिशु नया-नया चलना सीखता है तो किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है ।

- जब आपका शिशु क्रॉल करना या चलना सीखे तो ध्यान रहे कि आप अपने घर के दीवारों में नीचे दिए हुए इलेक्ट्रिक सॉकेट्स को कवर कर दें नहीं तो आपका शिशु उसमें अपनी उंगलियां डाल सकता है और इससे वो भयानक इलेक्ट्रिक शॉक का शिकार हो सकता है।

- रैक के ऊपर कोई भी भारी सामान ना रखें क्योंकि जब आपका शिशु क्रॉल करना या चलना सीखता है ठीक उसी वक़्त वो चीज़ों को अच्छे से पकड़ना भी सिखने लगता है और उसी का नतीजा होता कि वो चीज़ों को उठा-उठाकर फेकने लगता है और अब ऐसे में अगर कोई भारी चीज़ रखी हो तो उससे वो खुद को भी चोट पहुंचा सकता है।

- फर्श को हमेशा साफ़ रखें, ध्यान रहे कि आप नीचे कोई भी छोटे खिलौने या खाने की चीज़ें ना गिराकर रखें क्योंकि शिशु जब चलना या क्रॉल करना सीखते हैं वो वक़्त ऐसा होता जब वो बहुत सी चीज़ें मुँह में भी लेना शुरू कर देते हैं, ऐसे में अगर वो खेल रहे हो और उन्होंने नीचे पड़ी कोई चीज़ मुँह में ले ली तो इससे उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।

ये सब तो बस कुछ ही चीज़ें हैं, इसके अलावा हमेशा एक बड़े को शिशु के साथ रहना चाहिए और उसपर ध्यान देना चाहिए क्योंकि आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी 'नज़र हटी दुर्घटना घटी' , साथ ही साथ घर के फर्नीचर को भी अच्छे से रखें ताकि शिशु के चलते-दौड़ते वक़्त उन्हें फर्नीचर के कोनों से चोट ना लगे। ड्रॉयर्स को लॉक करके रखें ताकि आपका शिशु उसे खोल ना सके और उसमें रखी चीज़ों को निकाल ना सके। माता-पिता को इन छोटी-छोटी लेकिन महत्वपूर्ण चीज़ों का अवश्य ध्यान रखना चाहिए क्योंकि आपके शिशु की सुरक्षा आपके हाथों में है,  इसलिए जितना हो सके शिशु पर नज़र रखें और उनकी हरकतों पर ध्यान दें ।

हैप्पी पैरेंटिंग !

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