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10 बार जब आपके पति ने सही तरह से बच्चों को संभाला।

जब भी आप किसी पिता के बारे में सोचती हैं, तो सबसे पहली बात जो दिमाग में आती है वह उनके हाथों से हुई ग़लतियाँ और गड़बड़। जब भी लोग कहते है कि इस बच्चे की परवरिश बहुत अच्छी तरह की गई है, तो अधिकतम श्रेय महिलाओं को ही जाता है और पिता हमेशा ही उनकी गड़बड़ भरी कहानियों के साथ ही रह जाते हैं।
तो चलिए, हम थोड़ा समय लेते हुए सोचते हैं कि हमारे पतियों ने कब एवं किस तरह से वाकई मे बच्चों की सही तरह से परवरिश की।

1. बच्चों के साथ वक्त गुज़ारना

चूंकि अधिकांश मामलों में पति ज़्यादातर बाहर ही होते हैं और इसलिए उन्हें बच्चों के साथ कम समय व्यतीत करने मिलता है, वे जितना भी समय निकाल सकते हैं, उतना समय बच्चों के साथ रहने की कोशिश करते हैं। हम जानते ही हैं कि घर पर एक पालक को थोड़ा सख्त होना पड़ता है और इस वजह से बच्चों की देखभाल करने का बोझ और झुंझलाहट का सामना पूरी तरह माँ को ही करना पड़ता है। जब कि पिता घर वापस आते है, और थोड़ा वक्त गुज़ारने पर ही वें मज़ेदार पालक बन जाते हैं। परंतु, इसके बारे में कुछ इस तरह से सोचें, क्यों कि वें उन्हें अापसे अपनी तरफ ले रहे है, और आपको खुद के बारे मे सोचने के लिए कुछ समय दे रहे है।

2. बच्चों से बराबर दूरी बनाए रखना

एक अच्छे पालक के विपरीत लगने के बावजूद, आपके पति वास्तव में आपके बच्चे को स्वतंत्र होने के लिए प्रोत्साहित करते रहते है, यह मैंने अपने पड़ोसी को देखकर सीखा है। अपनी साइकिल निकालते समय पड़ोसी के बच्चे को काफी संघर्ष करना पड़ रहा था,इसके बावजूद उस पिता ने बच्चे की मदद करने से इनकार कर दिया और उसे खुद ही साइकिल बाहर निकालने के लिए प्रोत्सािहत किया।मुझे लगा कि मुझे उसकी मदद करनी चाहिए, पर फिर मैंने देखा कि उसने खुद ही बाहर निकलने का मार्ग ढूँढ लिया था। कभी कभार अपने बच्चों की मदद करने की इच्छा को काबू में रखना उन्हें अधिक स्वतंत्र बनने और स्वयं ही परिस्थितियों के बारे में सोचने में सक्षम बनने में मददगार साबित होता है।

3. बच्चों की ज़िद और नखरों के सामने न झुकना

यह एक और सहायक सुझाव है, जो कि पिता से सिखा जा सकता है। अधिकांश माँएं अपने बच्चों के रोने-धोने के आगे हार मान लेती हैं। हालांकि, यदि उनकी ज़िद न मानी जाए तो बच्चे एक महत्वपूर्ण बात सीखते है कि वह हमेशा ज़िद करने से और रोने से जो चाहिए वह प्राप्त नहीं कर सकते। अंततः  बच्चा दो चीजों में से एक करेगा, वह या तो आपके पास आएगा और समझाएगा कि वह  क्या चाहता है और क्यों या गुस्से में चिड़चिड़ा व्यवहार करेगा और तब आप उसे गले लगा सकते हैं और उसे समझा सकते हैं कि ऐसा व्यवहार करना ठीक नहीं है । पिता हमेशा ही पहला , मतलब, आत्मनिरीक्षण वाला मार्ग अपनाते हैं जो वास्तव में बच्चे को मदद करता हैं और उसे महत्वपूर्ण सबक भी सिखा देता है। हम बस इतनी आशा करते हैं कि पिता, जहां तक संभव हो तब तक घर के बाहर ऐसा ना करे, वरना उन्हें लोगों की गुस्साई नज़रों का सामना करना पड़ सकता है।

4. बच्चों को साथ घुलमिल के रहना

पिता को अपने बच्चों के साथ मिलकर कुछ करने मे ज़्यादा मज़ा आता है, जब कि सिर्फ उन्हें कुछ करते हुए देखना और सिर्फ निगरानी करना उनसे नही होता। उन्हें बच्चों के साथ खेलना, मूवि देखना बहुत भाता है, और इसी प्रकार की कई गतिविधियों मे वें बच्चों के साथ मज़े करते है। इस तरह के बर्ताव से बच्चे भी अपने माता-पिता से ज़्यादा खुलकर बात करने लगते है।

5. खुद के कार्य पर भी बराबर ध्यान देना

जब आप माता-पिता बनते हैं तो ज्यादातर लोग यह उम्मीद करते हैं कि यह एक 24/7 करने वाला काम है। ज्यादातर माँएं अपने बच्चों की ज़रूरतों को पहले रखती और उनकी अपनी ज़रूरतों की उपेक्षा कर देतीं हैं। यह अच्छी बात है, हालांकि, अापके पति इस चीज़ को कैसे संभालते है उसे ज़रा करीब से देखें और सीखें। क्या आप अपने बच्चों को उन्हें परेशान करते देखती हैं? जब वह अपने लैपटॉप के सामने व्यस्त रहते है या तब जब वह कोई खेल देख रहें हो? शायद, लेकिन अक्सर नहीं,इसका कारण यह है कि आपके बच्चे को कुछ समय के दौरान उन्हें परेशान नहीं करने का आदेश किया गया है। इसी तरह आप भी अपने लिए कुछ समय निकाल सकती हैं। अपने बच्चों को बताएं कि किताब पढ़ते समय या बागवानी करते समय माँ को परेशान नहीं करना चाहिए, अपने बच्चों को परिस्थिति अनुसार व्यवहार करना सिखाए और आप इस तरह खुद के लिए समय निकाल लें।

6. बिना किसी भेदभाव और धारणा के अनुसार परवरिश करना

क्या आपने कभी किसी पिता के बारे में सुना है जो दूसरे किसी पिता की परवरिश को गलत कह रहा हो? मुझे नही लगता ऐसा भी पिता करते होंगें। आपने फिर भी माताओं के बारे में सुना होगा जो अन्य माताओं की परवरिश की तुलना करती हैं और उसके अनुसार दूसरों पर निर्णय पारित करती हैं। यह एक आदत है, जिसे माताओं को अपने पतियों से सीखना होगा और खुद को बदलना होगा। पिता अपने द्वारा की गई ग़लतियों की कहानियों के बारे मे बात करते हैं, जो कि अच्छे माता-पिताओं द्वारा बताई गई बातों की तुलना में शायद अधिक फ़ायदेमंद होती है। जब आप किसी अन्य व्यक्ति की गलतियों के बारे में सुनते हैं, तो आप निश्चित रूप से यह सुनिश्चित करते हैं कि आप उस गलती से बचेंगे, क्योंकि कोई नही जानता किस वजह से क्या हो जाए?

7. अनजान बने रहना

क्या आपने कभी भी अपने बच्चे को अपने पिता से कहते हुए सुना है, "माँ इसे इस तरह पसंद करती है" या "यह वही है जो माँ करती है"। जब वे कुछ चीज़ों के बारे में अनजान हो, तब आपके बच्चे की विचार करने की शक्ति बहुत काम आती है।जब आपके बच्चे को यक़ीन हो जाए कि पिता को किसी चीज़ के बारे में पता नहीं है, लेकिन उसने मम्मी को वही कार्य करते देखा है, तो वह फिर थोड़ी देर देखकर कार्य को स्वयं ही कर लेता है। यह आपके पति का एक और तरीका है जो आपके बच्चे को दूसरों से सिख लेकर काम करना सिखाता है और स्वतंत्र होना भी सिखाता है।

8. बच्चों से समझदारी-भरा व्यवहार करना

अपने पति से आप इतनी उम्मीद रख सकती है कि वह कभी भी बच्चों का बिस्तर नही बनाकर देंगे या उनकी बैग भरने मे सहायता नहीं करेंगे क्योकि वे उम्मीद करते हैं कि बच्चों को यह सब कार्य स्वयं करने चाहिए और आपको भी ऐसा ही करना चाहिए। माताओं के रूप में, हम यह सोचते हैं कि हमें हर संभव तरीके से हमारे बच्चे के लिए ज़िंदगी आसान बनानी चाहिए। परंतु, हम इस के नकारात्मक असर का एहसास नहीं कर पाते हैं कि ऐसा करके हम वास्तव में अपने बच्चों को आलसी और बिगड़ैल बना देते हैं। दूसरी तरफ पति, बच्चों को अपना काम स्वयं करने की सिख देते है।

9. बच्चे की भूख को बने रहने देना

महिलाएं अपने बच्चों को लगातार  खाना खिलाती रहती हैं, खासकर तब जब वह "मुझे भूख लगी है" ऐसा कहते हैं। हालांकि, ज्यादातर समय शायद बच्चों को भूख नहीं लगी होती है, लेकिन ऊब कर बस कुछ चटपटा खाना चाहते हैं।पिता को तो कभी कभी पता ही नहीं होता है कि स्नैक्स रखें कहा है? उन्हें तो समझ भी नही आता होगा कि बच्चे को क्या दें? वे शायद बच्चों को "रात के खाने की प्रतीक्षा करें!" ऐसा बता देते होंगे, जो वास्तव में बच्चे की भूख को बढ़ाने का और उसे स्वस्थ भोजन का महत्व सिखाने का एक अच्छा तरीका है।

10. इंकार करना

यह संभवत: एक ऐसी चीज़ है जिसे बहुत कम आंका जाता है। पर अभी तक की सहायक युक्तियों में से यह सबसे महत्वपूर्ण युक्ति है जो आप अपने पति से सिख सकती हैं। जब आपके बच्चे एक अनुचित ज़िद अड़ जाते हैं, तो आप बहाना बनाने लगते हैं कि उन्हें वह चीज़ क्यों नहीं दी जा सकती है, हालांकि, कभी-कभी सिर्फ एक सीधे जवाब से काम हो जाता है। मैंने देखा है कि पिता बिना किसी भी स्पष्टीकरण के बच्चे के अनुचित अनुरोधों को नकार देते हैं। आखिरकार, बच्चा भी समझ जाता है कि पिता को प्रश्न पूछने का कोई फायदा नही है और वह ज़िद करना छोड़ देता है। बात एकदम सीधी सी है, ना तो कोई प्रश्न पूछा जाएगा, ना ही कोई उत्तर देना पड़ेगा।

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