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बी.सी.जी टीके के बारे में जानिए महत्वपूर्ण बातें


बी.सी.जी टीके का पूरा नाम है बैसिलस - कालमेट - ग्यूरिन वैक्सीन।  ये टी.बी से बचाव करता है । ये आम तौर पर नवजात शिशु को दिया जाता है जिन्हे टी.बी का ज़्यादा खतरा होता है । वे वयस्क जिन्हे टी.बी होने की आशंका है वे भी लगवा सकते हैं ।

हालांकि टी.बी टीके के कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं पर ये टी.बी, मूत्राशय के कैंसर और कुष्ठरोग  यानि लेप्रोसी से भी सुरक्षित रखता है ।

 टी.बी गंभीर बीमारी है और हवा, पानी से फैल जाती है । ये आमतौर पर फेफड़ों पर असर करती है , पर बदन के अन्य हिस्से भी प्रभावित होते हैं । इसके ज्यादातर लक्षण फेफड़ों से जुड़े होते हैं । प्रमुख लक्षण हैं बुखार, कपकपी  लगना, रात में पसीना आना, भूख न लगना, वज़न गिरना और थकान ।

जिन  घरों में  किसी  को टी.बी है, वहाँ बच्चों में टी.बी संक्रमण  का खतरा बढ़ जाता है । जिन बच्चों को एच.आई.वी  होता है वे टी.बी से जल्द  प्रभावित हो जाते हैं । क्योंकि उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता काफी कम  हो जाती है ।

टी.बी टीका उन शिशु शिशुओं और बच्चों को दिया जाता है जिन्हे टी.बी संक्रमण का ज़्यादा खतरा होता है । टीकाकरण के पश्चात त्वचा पर सूजन आ जाती है और थोड़ा दर्द  भी होता है । टीका त्वचा के गहरे हिस्से में डाला जाता है । इससे दूसरे संक्रमण फैलने का डर रहता है जो की रक्त-कोशिकाओं द्वारा शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुँच जाता है । वैज्ञानिक भाषा में रक्त कोशिकाओं को लिम्फ नोड कहते हैं ।  लिम्फ नोड सूज जाती हैं और प्रभावित हिस्सों में लाली आ जाती है । टीकाकरण पश्चात लोगों तथा बच्चों को बुखार की शिकायत  हो सकती है । पेट दर्द व थकान की तकलीफ  भी हो सकती है ।  इस टी.बी टीके के और भी नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं इसलिए ये सबके लिए सही नहीं । चिकित्सक की सलाह के बिना कोई भी टिका मत लें । बच्चों और शिशु को टी.बी टीका सोच समझकर अनुभवी डॉक्टर की देख-रेख में लगवाईयेगा  ।

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