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आपकी पेट की चर्बी कम ना होने के 7 कारण

1. जन्मोत्तर डिप्रेशन:

अनुसंधान ने पाया है कि डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों या डिप्रेशन के लक्षणों का प्रदर्शन करने वाले लोगो के पेट के चारों ओर बहुत अधिक चर्बी जमा हो जाती है। ऐसा भूख की कमी, कुछ भी करने की प्रेरणा की कमी (खासकर व्यायाम)  या किसी चुनिदां प्रकार के भोजन (फास्ट फूड) की बढ़ती हुई मात्रा के कारण हो सकता है जो चर्बी को बढ़ाने मे मदद करता है, और साधारणतः यह सब लक्षण डिप्रेशन के साथ ही आते है। कई महिलाओं को जन्म देने के बाद डिप्रेशन का सामना करना पड़ता है; इसे प्रसवोत्तर या जन्मोत्तर डिप्रेशन कहा जाता है और महिलाएँ इस परिस्थिति मे किसी भी सामान्य डिप्रेशन पीड़ित व्यक्ति के समान लक्षणों का सामना करती है। इस स्थिति पर काबू पाने का एक तरीका है व्यायाम करना। इससे मस्तिष्क में कुछ हार्मोन और रसायनों की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे हमारी मनःस्थिति और मेटाबॉलिसम पर भी काफी फर्क पड़ता है। व्यायाम करने से आम तौर पर आपके डिप्रेशन भरे मूड को कुछ हद तक कम करने में मदद मिलेगी और आपकी चर्बी कम करने में भी सहायता होगी।

2.
भोजन:

खाद्य पदार्थ ही पेट की चर्बी बढ़ने का कारण बनते है, और इससे ही हम अतिरिक्त चर्बी से छुटकारा भी पा सकते है, यदि हम अपने सेवन को काबू मे रख सकते हो तो। आप शायद गलत प्रकार की वसा का सेवन कर रहें हो, और यही कारण है कि आपको चर्बी घटाने मे मुश्किलें आ रही हो, भले ही आप नियमित रूप से व्यायाम कर रहे हो या कम स्नैक्स का सेवन कर रहें हो। कुछ प्रकार के वसा (साच्यूरेटेड फैट्स) ऐसे होते हैं जो आपके पेट के आस-पास की चर्बी को बढ़ा सकते हैं। दूसरी ओर, मोनोअनस्यूट्रेटेड फैट्स और कुछ प्रकार के पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स में एंटी-इन्फ्लैमेटरी गुण होते हैं जो आपके शरीर को लाभ पहुंचा सकते हैं। हालांकि, इन्हें कम मात्रा में ही खाया जाना चाहिए क्योंकि किसी भी प्रकार के वसा का यदि ज़्यादा मात्रा मे सेवन कर लिया जाए तो उससे वज़न बढ़ सकता है और चर्बी भी बढ़ सकती है। इसके अलावा, ऐसा भी हो सकता है कि आपके आहार में मैग्नीशियम का स्तर  बहुत कम हो, जो कि शरीर में बड़ी मात्रा में रासायनिक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक होता है, जिसमें ब्लड शुगर के स्तर और दिल की धड़कन को नियंत्रित करना भी शामिल है। हाल ही मे किए गए कई अध्ययनों ने निष्कर्ष निकाला है कि यह वजन और शरीर को आकार देने की प्रक्रिया मे भी योगदान देता है। इसलिए, यदि हम इस पोषक तत्व से भरपूर  खाद्य पदार्थों का सेवन करेंगे तो वजन कम करने की प्रक्रिया मे काफी सहायता हो सकती है।

3. व्यायाम:

आपके द्वारा किए गए कई अलग-अलग व्यायाम, या बहुत सख्तता और नियमितता से किए गए व्यायामों के बावजूद  आप अपने आप को पहले जितनी ही वसा के साथ पाते है, जो जाने का नाम ही नहीं ले रही हो। इसके कई प्रकार के कारण हो सकते है जैसे गलत प्रकार की कसरत करना, बहुत से लोग यह मानते हैं कि वजन कम करने के लिए कार्डियो कसरत पर ज़्यादा फोकस होना चाहिए क्योंकि मांसपेशियों की बढ़त इस संबंध में मदद नहीं करेगी  परंतु, ठीक तरह से पेट की वसा को खोने और आकार मे लाने के लिए, कार्डियो और मांसपेशियों के निर्माण मे उचित योजना का पालन करना चाहिए । ताकत बढ़ाने के व्यायाम करने से शरीर की मांसपेशियों को बढ़ने मे सहायता मिलती है और इसके बदले में अधिक वसा को जलाने में भी मदद मिलती है जबकि अगर सिर्फ कार्डियो की कसरतों पर फ़ोकस होता रहे, तो शरीर की मेटाबॉलिसम जल्द ही इन परिवर्तित गतिविधि के अनुसार ढ़ल जाता है।

4. आयु:

जैसे जैसे आप बड़े होते जाते हैं, आपके शरीर का मेटाबॉलिसम और कैलोरी को जलाने की क्षमता भी कम होती जाती है। आप पाएंगे कि जब आप कॉलेज मे थे, आपके  वज़न और चर्बी में आसानी से बदलाव आता था, पर अब वे बहुत धीमे धीमे घटते है। आपका  शरीर अब अपने वज़न घटाने के तरीक़ों मे बदलाव करने लगा है।

5. पैकेज / फास्ट फूड:

प्रोसेस्ड भोजन शरीर मे सूजन को बढ़ाता है, और यह, बदले में, पेट की वसा कम करने की शरीर की क्षमता को कम कर देता है। ये पदार्थ सैच्यूरेटेड फैट्स और ट्रांस फैट्स से भी भरपूर होते हैं। ये आपको कम भरा हुआ महसूस करने में भी सहायक होते हैं जो आपके भोजन की मात्रा को बढ़ाते है और बदले मे पेट की चर्बी को बढ़ा देते है। विशेष रूप से गर्भावस्था के दौरान और बाद में भी आपको वसायुक्त भोजन के लिए बहुत अधिक लालच आ सकता है जिससे आपके लिए जन्म देने के बाद भी पेट की वसा खोना मुश्किल लगेगा। प्राकृतिक और ताजे फल और सब्जियां एंटीइनफ्लेमेटरी गुण से भरपूर होते हैं और उनमे एंटीऑक्सिडेंट गुण भी होते हैं जो पेट की वसा से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। यहां तक कि पदार्थ जैसे डायट सोडा वजन घटाने की क्षमता कम करते हैं, क्योंकि हम उसकी वजह से गलत तरीके की व्याख्या कर लेते हैं कि कितनी कैलोरी का सेवन हो रहा है, और इस तरह से हम भी ज़रूरत से अधिक भोजन कर लेते है।

6. नींद:

पर्याप्त नींद नहीं मिलना गर्भावस्था के बाद वजन घटाने की सबसे महत्वपूर्ण बाधा है क्योंकि एक बार जब आपके बच्चे हो जाते हैं, तो आप चैन की नींद तो अलविदा हो जाती है। नींद की कमी एक विशेष हार्मोन का उत्पादन करती है जो एक व्यक्ति में अधिक भूख जगाती है और एक दूसरा हार्मोन कम पैदा होने लगता है जिससे आपको भरा हुआ और संतुष्ट महसूस हो। इसलिए, जब हम नींद से वंचित होते है, तो हम सामान्य दिन से अधिक खाना खाते हैं।

7. तनाव:

एक माँ होना किसी भी तनाव मुक्त नौकरी के पूर्ण विपरीत है। इतनी सारी अलग-अलग चीजों को संभालना, बच्चों की और घर की देखभाल करने से लेकर,और न जाने कितनी अधिक चीजें हो सकती हैं, जो आपके तनाव के स्तर में बढ़ाती है। तनाव में वृद्धि  कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ावा देती है। कोर्टिसोल वसा की मात्रा बढ़ाता है जो आपके शरीर की वसा कोशिकाओं को बड़ा कर देता है, जिससे वजन कम करना और भी मुश्किल हो जाता है। इस तरह से प्राप्त अधिकांश वजन पेट क्षेत्र के आसपास देखा जा सकता है। तनाव के कारण शरीर एड्रेनालाईन  छोड़ता है,और यह  पाचन को प्रभावित करता है ।आप तनाव से निपटने के लिए बिना सोचें विचारे अधिक प्रोसेस्ड फूड का उपभोग करने लगते हैं।

सीमित मात्रा मे पेट की वसा होना अच्छी बात है, क्योंकि यह आपके अंगों की रक्षा करती है, परंतु बहुत अधिक वसा अस्वास्थ्यकर है, क्योंकि यह हृदय रोग का आमंत्रण दे  सकता है या मधुमेह के विकास की शुरूआत करा सकता है। इसलिए, वसायुक्त खाद्य पदार्थों को कम मात्रा में खाया जाना चाहिए और आप अपनी तरफ से इतना सुनिश्चित कर लें कि आप सही प्रकार के वसा वाले पदार्थ खा रहें हो।

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